नई दिल्ली में प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर पूर्व मुख्यमंत्री ने संताली भाषा की मूल लिपि को संरक्षण और बढ़ावा देने का उठाया मुद्दा
शिक्षा मंत्रालय से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर संताली भाषा की मूल और सर्वमान्य लिपि ‘ओलचिकी’ में शैक्षणिक एवं पठन-पाठन सामग्री प्रकाशित करने की मांग उठाई। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा विभिन्न पाठ्य पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्रियों के निर्माण एवं प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है, जिसमें संताली भाषा की पुस्तकों को देवनागरी लिपि में तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि संताली भाषा से संबंधित सभी सामग्री केवल उसकी मूल लिपि ओलचिकी में ही तैयार और प्रकाशित की जाए, ताकि भाषा की मौलिकता और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।
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संताली भाषा की मूल लिपि को संरक्षण देने की मांग
रघुवर दास ने शिक्षा मंत्री को बताया कि वर्ष 2025 में पूरे देश में ओलचिकी लिपि का शताब्दी वर्ष बड़े उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया था। इस अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। उन्होंने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ओलचिकी लिपि में अनूदित भारतीय संविधान का लोकार्पण किया गया, जो संताली समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि थी। उन्होंने यह भी बताया कि हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर ओलचिकी लिपि में देशवासियों को संदेश देकर इस लिपि के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्रदान किया।
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ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष का उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। संताली भाषा की अपनी स्वतंत्र, वैज्ञानिक और व्यापक रूप से स्वीकृत लिपि ओलचिकी है, जिसे देश और विदेश में करोड़ों लोग उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में झारखंड में डबल इंजन सरकार के दौरान संताल बहुल रेलवे स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों के नामपट्टों पर ओलचिकी लिपि को स्थान दिया गया। इसके अलावा साहित्य अकादमी सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा भी संताली भाषा में ओलचिकी लिपि का उपयोग किया जा रहा है। केंद्र सरकार की कई वेबसाइटों पर संताली भाषा केवल ओलचिकी लिपि में उपलब्ध है।
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राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा ओलचिकी लिपि का उपयोग
रघुवर दास ने अपने ज्ञापन में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, असम समेत नेपाल और बांग्लादेश में भी ओलचिकी लिपि के व्यापक उपयोग का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय के अधीन सभी संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि संताली भाषा की पाठ्यपुस्तकों, संदर्भ ग्रंथों, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं तथा डिजिटल शिक्षण सामग्री का प्रकाशन केवल ओलचिकी लिपि में किया जाए। उनका कहना था कि इससे करोड़ों संताली भाषियों की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर शिक्षा मंत्री के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।



























