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Potka : वीर शहीद दुसा-युगल के 196वें शहादत दिवस पर सारसे में रक्तदान शिविर आयोजित

  • पोटका में शहीदों को “रक्तांजलि”, ग्रामीणों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग
  • शहीदों की स्मृति में सामाजिक सेवा का संकल्प

जेबी लाइव, रिपोर्ट

पोटका : पोटका प्रखंड अंतर्गत सारसे गांव में वीर शहीद दुसा-युगल के 196वें शहादत दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि विधायक संजीव सरदार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ना समाज के लिए शुभ संकेत है। रक्तदान से किसी की जान बचाई जा सकती है और इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए इसे मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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आयोजकों ने बताया शहीदों की कुर्बानी का महत्व

रक्तदान शिविर का आयोजन हिमांशु सरदार, हरिश्चंद्र सरदार, अभिजीत सरदार तथा प्रतीक संघर्ष फाउंडेशन के अरिजीत सरकार और जमशेदपुर ब्लड बैंक के सहयोग से किया गया। हिमांशु सरदार ने कहा कि वीर शहीद दुसा-युगल ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी स्मृति में आयोजित यह शिविर इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि रक्त की कमी से किसी की जान न जाए। हरिश्चंद्र सरदार ने कहा कि शहीद दुसा-युगल हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनकी कुर्बानी को याद करते हुए यह आयोजन किया गया है।

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भ्रांतियां टूटीं, युवाओं ने दिखाया उत्साह

प्रतीक संघर्ष फाउंडेशन ने रक्तदान करने वाले युवाओं को वीर शहीद दुसा-युगल को श्रद्धांजलि स्वरूप “रक्तांजलि” अर्पित करने वाला बताया और रक्तवीरों को सलाम किया। वक्ताओं ने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं, लेकिन अब लोग जागरूक हो रहे हैं और आगे बढ़कर रक्तदान कर रहे हैं। इस शिविर को सफल बनाने में चंद्र मोहन सरदार, लखीराम सरदार, सुनील सरदार, विजन सरदार, विशेश्वर सरदार, जय सिंह सरदार सहित अन्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Seraikela : सरायकेला के तीन डैम बनेंगे पर्यटन हब, सीतारामपुर, पालना और सतनाला में शुरू होगी बोटिंग

पर्यटकों को मिलेगा नौकाविहार और एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद उपायुक्त ने प्राक्कलन तैयार करने और पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों

  • पर्यटकों को मिलेगा नौकाविहार और एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद
  • उपायुक्त ने प्राक्कलन तैयार करने और पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के पर्यटन स्थलों को आकर्षक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। सीतारामपुर डैम, पालना डैम और सतनाला डैम को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इन तीनों जलाशयों में पर्यटकों के लिए बोटिंग (नौकाविहार) की सुविधा शुरू करने की योजना है। इसे लेकर समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पर्यटन संवर्धन समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के पर्यटन स्थलों के कायाकल्प, पर्यटकों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने जिला खेल पदाधिकारी-सह-जिला पर्यटन पदाधिकारी अमित कुमार को निर्देश दिया कि तीनों डैमों का भौतिक आकलन कर बोटिंग संचालन की संभावनाओं का पता लगाएं तथा आवश्यक प्रस्ताव एवं प्राक्कलन तैयार कर जल्द विभाग को उपलब्ध कराएं।

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सीतारामपुर, सतनाला और पालना डैम में नौकाविहार की सुविधा शुरू करने की तैयारी

बैठक में सीतारामपुर डैम, सतनाला डैम, भीमखंडा, श्मशान काली मंदिर सरायकेला, शिव मंदिर रामगढ़ और करकेटा डैम कुचाई सहित ग्रेड-ए, बी एवं सी श्रेणी में चिह्नित पर्यटन स्थलों पर चल रहे विकास कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि योजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो। साथ ही पर्यटन स्थलों के आसपास संचालित होटलों और होमस्टे का नियमानुसार पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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पर्यटन स्थलों पर जिपलाइन, एडवेंचर झूले और आकर्षक लाइटिंग की होगी व्यवस्था

पर्यटकों के आकर्षण और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके तहत कनेक्टिंग एप्रोच रोड, बैठने एवं विश्राम करने की व्यवस्था, गजीबो, जिपलाइन, एडवेंचर झूले, आकर्षक लाइटिंग, सेल्फी प्वाइंट और सूचनात्मक साइनेज जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर पहुंचने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलना चाहिए। इसके लिए आधारभूत संरचना के साथ सुरक्षा और साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयबद्धता को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।

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सोशल मीडिया से होगी जिले के पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग, बैठक में कई अधिकारी रहे मौजूद

उपायुक्त ने जिले के पर्यटन स्थलों की पहचान और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्रचार माध्यमों से व्यापक ब्रांडिंग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरायकेला-खरसावां जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बेहतर सुविधाओं और प्रभावी प्रचार-प्रसार से अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी शंकराचार्य सामद, जिला खेल पदाधिकारी-सह-जिला पर्यटन पदाधिकारी अमित कुमार, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), जिला स्तरीय पर्यटन संवर्धन कार्यकारिणी समिति के सदस्य तथा विभिन्न संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

Seraikela : उड़ती धूल से परेशान शासन गांव के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, तीन घंटे तक सड़क जाम

सरायकेला-राजनगर मुख्य मार्ग पर सुबह 6 से 9 बजे तक ठप रहा आवागमन रोजाना तीन बार पानी छिड़काव का आश्वासन

  • सरायकेला-राजनगर मुख्य मार्ग पर सुबह 6 से 9 बजे तक ठप रहा आवागमन
  • रोजाना तीन बार पानी छिड़काव का आश्वासन पूरा नहीं होने पर ग्रामीणों ने जताया विरोध

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : सरायकेला-राजनगर मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से परेशान शासन गांव के ग्रामीणों का आक्रोश शुक्रवार की सुबह एक बार फिर फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने सुबह करीब 6 बजे सड़क पर उतरकर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। अचानक सड़क जाम होने से मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे राहगीरों, यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क पर लगातार वाहनों के गुजरने से भारी मात्रा में धूल उड़ती है, जिससे आसपास के घरों और दुकानों में धूल जमा हो रही है। लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी हो रही है। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। करीब तीन घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।

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प्रशासन के आश्वासन के बावजूद बंद हो गया था पानी का छिड़काव

ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले भी उड़ती धूल की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने लगातार 36 घंटे तक सड़क जाम किया था। उस समय स्थानीय प्रशासन ने प्रतिदिन तीन बार टैंकर के माध्यम से सड़क पर पानी का छिड़काव कराने का आश्वासन दिया था। आश्वासन के बाद कुछ दिनों तक नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया गया, जिससे ग्रामीणों को धूल से थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन कुछ दिनों बाद ही पानी का छिड़काव बंद कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से किए गए वादे को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके कारण समस्या फिर से जस की तस हो गई। लगातार उड़ती धूल से परेशान ग्रामीणों ने शुक्रवार को सुबह-सुबह सड़क जाम कर प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक सड़क पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक उनकी परेशानी दूर नहीं होगी।

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पानी छिड़काव शुरू होने के आश्वासन पर सुबह 9 बजे हटा जाम

सड़क जाम की सूचना मिलते ही सरायकेला थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। काफी देर तक बातचीत के बाद प्रशासन ने तत्काल पानी का टैंकर मंगवाकर सड़क पर छिड़काव शुरू कराया। साथ ही ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि धूल की समस्या से राहत दिलाने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सुबह करीब 9 बजे सड़क जाम समाप्त कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सड़क के दोनों ओर फंसे वाहनों को धीरे-धीरे निकलवाकर यातायात सामान्य कराया। हालांकि, ग्रामीणों ने नियमित पानी छिड़काव की व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितनी गंभीरता से अमल करता है।

Seraikela : समग्र शिक्षा एवं एमडीएम योजनाओं की जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित

184 विद्यालयों में हुए सामाजिक अंकेक्षण की हुई समीक्षा समग्र शिक्षा के 78 और मध्याह्न भोजन के 14 मुद्दे जनसुनवाई

  • 184 विद्यालयों में हुए सामाजिक अंकेक्षण की हुई समीक्षा
  • समग्र शिक्षा के 78 और मध्याह्न भोजन के 14 मुद्दे जनसुनवाई में रखे गए
  • शिक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर अधिकारियों ने दिया जोर

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : उपविकास आयुक्त की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे से समग्र शिक्षा एवं मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के तहत सामाजिक अंकेक्षण की जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले के कुल 184 विद्यालयों में सामाजिक अंकेक्षण कराया गया था। इनमें सभी 184 विद्यालय समग्र शिक्षा के तथा 60 विद्यालय मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े थे। सामाजिक अंकेक्षण के बाद प्रखंड स्तरीय जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके बाद जिला स्तर पर लंबित मामलों और मुद्दों की सुनवाई की गई। समग्र शिक्षा से संबंधित कुल 930 मुद्दों में से 78 तथा मध्याह्न भोजन योजना के 165 मुद्दों में से 14 मुद्दे जिला स्तरीय जनसुनवाई में प्रस्तुत किए गए।

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समग्र शिक्षा और एमडीएम के लंबित मुद्दों पर हुई सुनवाई

जनसुनवाई के दौरान बताया गया कि शेष सभी मुद्दों का निष्पादन विद्यालय एवं प्रखंड स्तर पर पहले ही कर लिया गया है। बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा की गई। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा, जिला शिक्षा अधीक्षक अमित कुमार, सोशल ऑडिट यूनिट की टीम सहित संबंधित प्रखंडों के बीईईओ, बीपीओ, बीपीएम, अकाउंटेंट, ब्लॉक एमआईएस ऑपरेटर, एमडीएम ऑपरेटर तथा जिले के विभिन्न प्रभागों के प्रभारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से सामने आई समस्याओं के समाधान और शिक्षा संबंधी योजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने पर जोर दिया।

Seraikela : धनतेरस पर सरायकेला बाजार में उमड़ी खरीदारों की भीड़, 10 करोड़ से अधिक का कारोबार

झाड़ू से लेकर सोने-चांदी तक की जमकर हुई खरीदारी जिले में 700 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की हुई

  • झाड़ू से लेकर सोने-चांदी तक की जमकर हुई खरीदारी
  • जिले में 700 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की हुई बिक्री; व्यापारियों के खिले चेहरे
  • सरायकेला के एक ज्वेलरी दुकान में धनतेरस पर खरीदारी के लिए उमड़ी ग्राहकों की भीड़

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : रोशनी, सुख-समृद्धि और उत्साह के पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का शुभारंभ शुक्रवार को धनतेरस के साथ हुआ। इस अवसर पर सरायकेला के मुख्य बाजारों में सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे। इसके कारण सराफा बाजार, बर्तन दुकान, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठानों और ऑटोमोबाइल शोरूम में दिनभर चहल-पहल बनी रही। शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने की परंपरा को लेकर सुबह से ही दुकानों के बाहर ग्राहकों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बाजार में उमड़ी भीड़ ने त्योहार के उत्साह के साथ कारोबारियों में भी नई उम्मीद जगा दी।

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धनतेरस पर झाड़ू और बर्तनों की दुकानों में रही सबसे अधिक रौनक

धनतेरस पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झाड़ू, पीतल और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसी परंपरा के चलते सरायकेला के मुख्य बाजार से लेकर फुटपाथों तक लगी दुकानों में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली। खासकर महिलाओं ने घरेलू उपयोग के सामान, झाड़ू और बर्तनों की जमकर खरीदारी की। वहीं सोने-चांदी के सिक्कों और आभूषणों की खरीदारी को लेकर ज्वेलरी दुकानों में भी दिनभर ग्राहकों का तांता लगा रहा। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती सामान खरीदते नजर आए। देर शाम तक सराफा दुकानों में खरीदारी का सिलसिला जारी रहा।

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ऑटोमोबाइल बाजार में भी धनतेरस का दिखा जबरदस्त उत्साह

इस वर्ष सरायकेला जिले का ऑटोमोबाइल बाजार भी काफी गुलजार रहा। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार जिले में 700 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री हुई। ग्राहकों ने धनतेरस पर वाहन की डिलीवरी लेने के लिए कई दिन पहले ही अपनी पसंद की गाड़ियों की बुकिंग करा रखी थी। शुभ मुहूर्त शुरू होते ही विभिन्न शोरूम में नए वाहनों की पूजा-अर्चना कर ग्राहकों को चाबियां सौंपने का सिलसिला शुरू हो गया। शोरूम में सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। दोपहिया वाहनों के साथ कारों की खरीदारी में भी लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। वाहन कारोबारियों के अनुसार धनतेरस पर मिली अच्छी प्रतिक्रिया से ऑटोमोबाइल सेक्टर में उत्साह का माहौल रहा।

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10 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान, बाजार में लौटी रौनक

स्थानीय व्यापारियों और बाजार विश्लेषकों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस वर्ष धनतेरस पर सरायकेला में 10 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। इसमें सराफा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही। टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की भी अच्छी बिक्री हुई। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार ग्राहकों में अधिक उत्साह देखने को मिला है। इससे बाजार को नई ऊर्जा मिली है और दीपावली के शेष दिनों में भी बेहतर कारोबार की उम्मीद बढ़ी है। इधर, बाजार में उमड़ी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद रहा। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में बाजार क्षेत्र में खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।

Kharagpur : खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर 1.40 करोड़ रुपये नकद बरामद, हावड़ा का युवक गिरफ्तार

टाटानगर से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर जा रहा था युवक प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर बैग की तलाशी में मिली भारी

  • टाटानगर से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर जा रहा था युवक
  • प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर बैग की तलाशी में मिली भारी नकदी; रुपये के स्रोत की जांच में जुटी जीआरपी
  • 1.40 करोड़ रुपये की बरामदगी के बाद जांच तेज, नकदी कहां से आई और कहां जानी थी, पता लगा रही पुलिस

जेबी लाइव, रिपोर्टर

खड़गपुर : खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर नियमित जांच अभियान के दौरान राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक के पास से 1 करोड़ 40 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से रेलवे पुलिस के अधिकारी भी हैरान रह गए। पुलिस ने पूरी रकम जब्त कर युवक को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, खड़गपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर जीआरपी की टीम नियमित जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक संदिग्ध युवक पर पड़ी, जो स्टेशन परिसर में घूम रहा था। उसकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद पुलिस ने उसे रोककर पूछताछ की और उसके पास मौजूद बैगों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान बैगों में भारी मात्रा में नकदी रखी मिली। इसके बाद पुलिस ने बरामद रुपयों की गिनती कराई, जिसमें कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपये होने की पुष्टि हुई।

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खड़गपुर स्टेशन पर जांच के दौरान जीआरपी के हाथ लगी बड़ी नकदी, बैगों से मिले 1.40 करोड़ रुपये

पुलिस के अनुसार, इतनी बड़ी रकम के संबंध में युवक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ के दौरान वह नकदी के स्रोत और उसे ले जाने के उद्देश्य के बारे में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दे पाया। इसके बाद जीआरपी ने नियमानुसार पूरी नकदी जब्त कर युवक को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार युवक पश्चिम बंगाल के हावड़ा का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वह टाटानगर से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर यात्रा करने वाला था। हालांकि, युवक के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और वह इसे किस स्थान पर तथा किस व्यक्ति तक पहुंचाने जा रहा था, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। रेलवे स्टेशन पर नियमित जांच के दौरान इतनी बड़ी नकदी बरामद होने के बाद पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

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टाटानगर से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर करने वाला था गिरफ्तार युवक, नकदी के स्रोत पर सवाल

फिलहाल जीआरपी गिरफ्तार युवक से पूछताछ कर नकदी के वास्तविक स्रोत का पता लगाने में जुटी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद रकम किसी वैध कारोबारी लेन-देन से जुड़ी है या इसके पीछे कोई अन्य गतिविधि है। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवक को इतनी बड़ी रकम किसने सौंपी थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। मामले की जांच में जरूरत पड़ने पर संबंधित अन्य एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है। पुलिस बरामद नकदी से जुड़े दस्तावेजों, यात्रा संबंधी जानकारी और युवक के संपर्कों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल युवक की गिरफ्तारी और 1.40 करोड़ रुपये की बरामदगी को रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा जांच के दौरान बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही नकदी के स्रोत और इसके इस्तेमाल से जुड़ी वास्तविक जानकारी सामने आ सकेगी।

Jamshedpur : दीपावली की खरीदारी शुरू, जमशेदपुर के बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग; कुम्हारों की दुकानों पर उमड़ रही भीड़

इलेक्ट्रॉनिक लाइटों और रंग-बिरंगी झालरों के बीच पारंपरिक दीयों का क्रेज बरकरार पूजा-पाठ के लिए मिट्टी के कलश, हाथी और

  • इलेक्ट्रॉनिक लाइटों और रंग-बिरंगी झालरों के बीच पारंपरिक दीयों का क्रेज बरकरार
  • पूजा-पाठ के लिए मिट्टी के कलश, हाथी और खिलौने भी खरीद रहे लोग
  • स्वदेशी परंपरा को मिल रहा बढ़ावा, मिट्टी के दीयों की खरीदारी से मजबूत होगी कुम्हारों की आजीविका

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही जमशेदपुर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट के साथ लोगों ने दीपावली की खरीदारी भी शुरू कर दी है। शहर के विभिन्न बाजारों में सुबह से शाम तक खरीदारों की चहल-पहल देखने को मिल रही है। खासकर मिट्टी के दीये, कलश, हाथी, खिलौने, धूपदानी और पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक मिट्टी की सामग्रियों की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी है। इन दुकानों पर सबसे अधिक महिलाएं खरीदारी करती नजर आ रही हैं। बाजारों में एक ओर इलेक्ट्रॉनिक लाइटें, रंग-बिरंगी झालरें और आधुनिक सजावटी सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मिट्टी के पारंपरिक दीयों की मांग भी बनी हुई है। लोग घरों की बाहरी सजावट के लिए आधुनिक रोशनी का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पूजा और शुभ अवसरों पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा को आज भी प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि दीपावली से पहले ही कुम्हारों की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है।

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इलेक्ट्रॉनिक झालरों के बीच मिट्टी के दीयों की चमक बरकरार, पारंपरिक सामान खरीद रहे लोग

खरीदारी करने पहुंची महिलाओं का कहना है कि दीपावली केवल घरों को रोशनी से सजाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक भी है। इस पर्व पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा में मिट्टी के दीये, कलश और अन्य पारंपरिक सामग्रियों का विशेष महत्व होता है। महिलाओं के अनुसार, आधुनिकता के इस दौर में भले ही घरों को सजाने के लिए कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध हो गए हैं, लेकिन मिट्टी के दीये का धार्मिक और भावनात्मक महत्व अपनी जगह कायम है। इलेक्ट्रॉनिक लाइटों से घर आकर्षक दिखाई दे सकता है, लेकिन मिट्टी के दीये जलाने से दीपावली की पारंपरिक अनुभूति और पूजा का माहौल अलग ही होता है। उनका कहना है कि हर साल दीपावली पर मिट्टी के दीये खरीदना और उन्हें घर तथा पूजा स्थल पर जलाना परिवार की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। यही कारण है कि इस बार भी वे मिट्टी के दीये और अन्य पूजा सामग्री खरीदने के लिए बाजार पहुंच रही हैं।

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महिलाओं की पहली पसंद बने मिट्टी के दीये, गणेश-लक्ष्मी पूजा के लिए पारंपरिक सामानों की खरीदारी

सनातन धर्म में दीपावली का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता एवं लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से रोशन कर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा की स्मृति में प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। लोगों का मानना है कि मिट्टी के दीये केवल प्रकाश का साधन नहीं हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी परंपरा के प्रतीक भी हैं। चाइनीज लाइटें और इलेक्ट्रॉनिक झालरें घरों को आकर्षक बना सकती हैं, लेकिन पूजा-पाठ में मिट्टी के दीयों का महत्व अलग है। यही वजह है कि आधुनिक सजावट के साधनों की उपलब्धता के बावजूद लोग दीपावली पर पारंपरिक मिट्टी के दीयों को विशेष स्थान देते हैं।

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भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की याद में मनाई जाती है दीपावली, मिट्टी के दीयों से जुड़ी है परंपरा

दीपावली का त्योहार मिट्टी के दीये और अन्य पारंपरिक सामान बनाने वाले कुम्हार परिवारों के लिए भी खास महत्व रखता है। कुम्हारों का कहना है कि मिट्टी के दीये तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी जुटाई जाती है। इसके बाद उसे साफ कर आकार दिया जाता है और धूप में सुखाने के बाद भट्ठी में पकाया जाता है। तैयार होने के बाद दीयों को बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में परिवार के सभी सदस्य सहयोग करते हैं। कुम्हारों के मुताबिक, आधुनिक दौर में इलेक्ट्रॉनिक लाइटों और सजावटी सामानों का चलन बढ़ने से पारंपरिक मिट्टी के सामानों के कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि दीपावली ऐसा अवसर है, जब मिट्टी के दीयों की मांग फिर बढ़ जाती है। इस वर्ष भी बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही शुरू होने से कुम्हार परिवारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद जगी है। उनका कहना है कि दीपावली के दौरान होने वाली बिक्री से उन्हें बेहतर आमदनी का अवसर मिलता है। उन्होंने लोगों से स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार मिट्टी के दीये और अन्य सामान खरीदने की अपील की, ताकि उनकी आजीविका को सहारा मिल सके।

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दीपावली से कुम्हार परिवारों को बड़ी उम्मीद, मिट्टी के दीयों की बिक्री से बढ़ेगी आमदनी

जमशेदपुर के बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग को स्वदेशी परंपरा और स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा देने के रूप में भी देखा जा रहा है। मिट्टी के दीये खरीदने से न केवल कुम्हार परिवारों को रोजगार मिलता है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला और संस्कृति भी सुरक्षित रहती है। स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए दीये और पूजा सामग्री खरीदना उनके श्रम को सम्मान देने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मददगार है। कुल मिलाकर, दीपावली की तैयारियों के बीच बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग यह साबित करती है कि आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बावजूद लोगों का अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव कायम है। इलेक्ट्रॉनिक रोशनी और रंग-बिरंगी झालरों के बीच मिट्टी के छोटे-छोटे दीये अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इस दीपावली मिट्टी के दीयों की लौ जहां घरों और मंदिरों को रोशन करेगी, वहीं स्थानीय कुम्हार परिवारों के जीवन में भी खुशियों और आर्थिक उम्मीदों का उजाला लेकर आएगी।

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