- मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ चौक में सभा, केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला
- 24 मार्च की दिल्ली रैली में शामिल होने का आह्वान
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मुरी : भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) झारखंड राज्य कमिटी की ओर से 8 मार्च 2026 को मुरी क्षेत्र में छोटानागपुर स्तरीय जन आक्रोश जत्था और सभा का आयोजन किया गया। जत्था चौक पहुंचकर सभा में तब्दील हुआ, जहां बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और आम लोग शामिल हुए। सभा में केंद्र सरकार की कथित किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने “4 लेबर कोड वापस लो”, “बिज और बिजली विधेयक रद्द करो”, “मनरेगा की वापसी करो”, “एमएसपी की कानूनी गारंटी करो”, “युद्ध नहीं शांति चाहिए” और “24 मार्च को दिल्ली चलो” जैसे नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण से आम जनता परेशान है और इन नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की जरूरत है।
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मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ मुरी में जन आक्रोश जत्था

सभा को संबोधित करते हुए माकपा केंद्रीय कमिटी सदस्य एवं सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता, माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य समीर दास, झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो और सीटू झारखंड महासचिव विश्वजीत देव सहित कई नेताओं ने केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 4 लेबर कोड, बिज और बिजली विधेयक तथा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों और मजदूरों के लिए “मौत की घंटी” साबित होंगे। नेताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर किया जा रहा है और किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिदिन किसानों की आत्महत्या की खबरें सामने आती हैं, लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।
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केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों पर नेताओं का तीखा हमला
सभा में आदिवासी मंच के राज्य संयोजक सुखनाथ लोहरा, सुरेश मुंडा, मदुवा कच्छप, शंकर उरांव, आएता उरांव, अनिल उरांव, देवनाथ गोप, मनिता उरांव, मिला कुमारी, प्रतिमा उरांव, पूनम उरांव, पुष्पा उरांव, बलदेव उरांव, राजेंद्र उरांव समेत कई सामाजिक और किसान नेताओं ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों को जाति-धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है, जिसे देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा की रक्षा के लिए भी संघर्ष जरूरी है। साथ ही वक्ताओं ने अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर संभावित हमले की निंदा करते हुए कहा कि भारत को अपनी गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर कायम रहना चाहिए। सभा में 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली जन आक्रोश रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया।























