- मोदी सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में रची थी राजनीतिक साजिश, विपक्ष की एकजुटता ने संघीय ढांचे को बचाया: सुधा गुप्ता
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित तिलक पुस्तकालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में मानगो की मेयर श्रीमती सुधा गुप्ता ने कहा कि लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक का गिरना केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र और भारतीय संविधान की ऐतिहासिक जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर मनमाने ढंग से परिसीमन करना चाहती थी। विपक्ष की एकजुटता ने सरकार की इस मंशा को भांप लिया और संघीय ढांचे के साथ होने वाली छेड़छाड़ को सफलतापूर्वक रोक दिया। श्रीमती गुप्ता ने स्पष्ट किया कि भाजपा महिला सशक्तिकरण का मुखौटा पहनकर केवल अपना राजनीतिक हित साधना चाहती थी।
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विपक्ष की एकजुटता से लोकतंत्र की जीत और परिसीमन की साजिश का पर्दाफाश
प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर पलटवार करते हुए सुधा गुप्ता ने कहा कि सत्ता पक्ष ने विपक्ष को डराने की कोशिश की थी। अमित शाह और प्रधानमंत्री के भाषणों से यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार इस बिल के जरिए विपक्ष को चुनावी रूप से हाशिए पर धकेलना चाहती थी। उन्होंने कहा कि भाजपा की योजना थी कि यदि बिल पास हो जाता है तो वे परिसीमन के जरिए लाभ उठाएंगे और यदि गिर जाता है तो विपक्ष को महिला विरोधी घोषित कर देंगे। लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने जातिगत आंकड़ों के बिना परिसीमन की इस साजिश को पहचान लिया। सरकार की मंशा केवल सत्ता हासिल करना था, न कि महिलाओं को वास्तव में उनका अधिकार देना। इस धक्के से घबराई सरकार अब इसे ‘ब्लैक डे’ कह रही है, जबकि जनता के लिए यह संविधान बचाने का सुनहरा दिन है।
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सत्ता पक्ष के बयानों पर पलटवार और भाजपा की चुनावी रणनीति की विफलता
जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के ऐन वक्त पर संसद का विशेष सत्र बुलाना और अंतिम क्षणों में विधेयक का मसौदा पेश करना भाजपा की जल्दबाजी और अलोकतांत्रिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि यदि मोदी सरकार महिला आरक्षण के प्रति वास्तव में गंभीर है, तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित विधेयक को तुरंत लागू किया जाए। कांग्रेस का स्टैंड स्पष्ट है कि वर्तमान की 543 लोकसभा सीटों में से ही 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने प्रमुख मांग दोहराई कि जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान है, उसी तरह ओबीसी महिलाओं को भी उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए। बिना ओबीसी कोटे के महिला आरक्षण अधूरा है और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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ओबीसी आरक्षण की मांग और महिला विधेयक को तुरंत लागू करने की चुनौती
प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के महिला विरोधी इतिहास को जनता के सामने रखा। उन्होंने उन्नाव, हाथरस, मणिपुर की हिंसा और महिला पहलवानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने कभी भी संकट में फंसी महिलाओं की सुध नहीं ली। जिलाध्यक्ष ने कहा कि देश की जनता अब भाजपा के झांसे में आने वाली नहीं है और अमित शाह द्वारा ‘भरोसा’ करने की अपील बेमानी हो चुकी है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी राजीव मिश्रा, अवधेश सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष मंजीत आनंद, नलिनी सिन्हा, मनोज झा, अपर्णा गुहा, संजय सिंह आजाद, आशुतोष सिंह, कौशल प्रधान, अंकुश बनर्जी और रश्मी निगार सहित कई गणमान्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह जीत लोकतंत्र को मजबूत करने वाली है।