मुख्य बाजार के बीच बसी दलित बस्ती में सड़क, नाली, शौचालय और आवास तक नहीं
जर्जर घरों में रहने को मजबूर परिवार, अबुआ आवास और पीएम आवास का लाभ नहीं
बारिश में नाले का गंदा पानी घरों में घुसता है, बीमारी का बढ़ा खतरा
आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, सैकड़ों बच्चे कुपोषण और शिक्षा से वंचित
थाना और अस्पताल के पास होने के बावजूद उपेक्षित बस्ती, लोगों ने उठाए सवाल
मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे बस्तीवासी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चांडिल : चांडिल के मुख्य बाजार स्थित हरिजन कालिंदी बस्ती आज भी विकास से कोसों दूर है। देश आजाद होने, बिहार से अलग होकर झारखंड बनने और राज्य में आदिवासी नेतृत्व वाली सरकार बनने के बावजूद इस दलित बस्ती की तस्वीर नहीं बदली। लगभग 80-90 घरों में बसे 150-160 परिवारों की आबादी करीब 1800 है, लेकिन यहां आज तक पक्की सड़क, नाली, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं। बरसात में पूरी बस्ती कीचड़ और गंदगी से भर जाती है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती से कुछ ही दूरी पर थाना, अस्पताल, पंचायत भवन और कई जनप्रतिनिधियों के आवास मौजूद हैं, फिर भी इस इलाके की समस्याओं पर किसी की नजर नहीं पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास सिर्फ भाषणों और सरकारी फाइलों तक सीमित रह गया है।
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प्रशासनिक दावों के बीच दलित बस्ती में जीवन बदहाल
बस्तीवासियों के अनुसार यहां अधिकांश लोग जर्जर और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में छतों से पानी टपकता है और मिट्टी की दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। लोगों का आरोप है कि न तो अबुआ आवास योजना का लाभ मिला और न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का। कई परिवार वर्षों से आवेदन करने के बावजूद सरकारी सूची में शामिल नहीं हो सके। महिलाओं ने बताया कि “मंईयां सम्मान योजना”, वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ भी यहां के अधिकांश जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाया है। राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने के लिए लोग लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। स्थानीय बुजुर्ग रामलाल कालिंदी कहते हैं कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई हालचाल लेने नहीं आता।
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योजनाओं के दावों के बीच छत और राशन के लिए संघर्ष जारी
बरसात के मौसम में हरिजन कालिंदी बस्ती की स्थिति और भयावह हो जाती है। बाजार की ओर से बहकर आने वाला नाले का गंदा पानी, कचरा और मल-मूत्र सीधे लोगों के घरों और रसोई तक पहुंच जाता है। बस्ती में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है। अधिकांश परिवारों के पास शौचालय नहीं होने से लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों को कीचड़ भरे रास्तों से होकर तालाब और नदी तक जाना पड़ता है। पीने के पानी के लिए पूरी बस्ती एकमात्र चापाकल पर निर्भर है, जो अक्सर खराब रहता है। जल-जमाव और गंदगी के कारण मलेरिया, डायरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। बस्तीवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से छोटी बीमारी भी गंभीर रूप ले लेती है।
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गंदगी और जल-जमाव से बीमारियों की चपेट में दलित बस्ती
बस्ती में बच्चों और महिलाओं की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां केवल एक जर्जर आंगनबाड़ी भवन है, जिसकी छत टूटी हुई है और दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। नियमित आंगनबाड़ी संचालन नहीं होने से लगभग 400-500 बच्चे पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं। गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण और पोषण नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि बच्चों के लिए स्कूल काफी दूर है और बरसात के दिनों में वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। बस्ती की सुनीता देवी कहती हैं कि “नेता लोग वोट मांगने आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। क्या दलित होना ही हमारी सबसे बड़ी गलती है?” बस्तीवासियों ने प्रशासन से स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी और शिक्षा की व्यवस्था जल्द शुरू करने की मांग की है।
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पोषाहार और शिक्षा से वंचित बच्चों का भविष्य अंधेरे में
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि थाना और अस्पताल से महज 200-300 मीटर दूरी पर स्थित होने के बावजूद हरिजन कालिंदी बस्ती आज तक विकास से वंचित क्यों है। बस्तीवासियों का कहना है कि एक वर्ष पहले नाली और सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। लोगों ने उपायुक्त सरायकेला और राज्य सरकार से बस्ती का दौरा कर तत्काल सड़क, नाली, शौचालय, पेयजल, आवास, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी की व्यवस्था करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच चांडिल की यह दलित बस्ती व्यवस्था और प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।























