ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकली विसर्जन शोभायात्रा
मानगो सुवर्णरेखा घाट पर करीब 250 प्रतिमाओं के विसर्जन का अनुमान
सुवर्णरेखा घाट पर 250 प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारी, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर में शारदीय नवरात्र के समापन और विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हर्षोल्लास और नम आंखों के बीच संपन्न हुआ। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों और ग्रामीण इलाकों में बंगाली एवं स्थानीय परंपराओं के अनुसार महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई और मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी। शाम होते ही ढोल-ताशों और पारंपरिक ढाक की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे और जयकारों के साथ भव्य विसर्जन शोभायात्राएं निकालीं। इन यात्राओं में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नृत्य करते हुए मां दुर्गा के जयकारे लगाए। इसके बाद मानगो सुवर्णरेखा नदी घाट, डिमना लेक, सोनारी घाट, कदमा घाट, खरकई नदी घाट, बाड़ बांध सहित विभिन्न जलाशयों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
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जमशेदपुर में सिंदूर खेला के बाद निकलीं भव्य विसर्जन शोभायात्राएं
प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए। विभिन्न नदी घाटों और प्रमुख चौक-चौराहों पर सिविल डिफेंस तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें गोताखोरों के साथ तैनात रहीं। प्रशासन का उद्देश्य विसर्जन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके अलावा दुर्गा पूजा सेंट्रल कमेटी, जुस्को, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी), मानगो नगर निगम और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने और विसर्जन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए संबंधित टीमों ने सहयोग किया।
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प्रतिमा विसर्जन के दौरान घाटों पर तैनात रहे गोताखोर और सुरक्षा दल
इस अवसर पर सिटी एसपी ललित मीना ने बताया कि मानगो स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट पर लगभग 250 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। विसर्जन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई देते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। साथ ही अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की प्रार्थना की। धार्मिक उत्साह, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच लौहनगरी में दुर्गोत्सव का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ।






















