- एचआईवी/एड्स जागरूकता, कानूनी अधिकारों और हेल्पलाइन सेवाओं पर छात्राओं को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
- HIV पीड़ितों के कानूनी अधिकार और शिकायत के विकल्प
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डीएलएसए, सिविल कोर्ट जमशेदपुर के सचिव महोदय के निर्देशानुसार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, सुंदरनगर में लीगल लिटरेसी क्लब के सदस्यों के सहयोग से एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को HIV/AIDS के प्रति जागरूक करना और उनसे जुड़ी गलतफहमियों को दूर करना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि एचआईवी वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे छोटी बीमारियाँ भी गंभीर रूप ले लेती हैं। छात्राओं को एचआईवी/एड्स के लक्षणों जैसे लगातार कमजोरी, गंभीर संक्रमण, बार-बार निमोनिया, याददाश्त कमजोर होना और वजन में तेज कमी के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया।
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एचआईवी वायरस कैसे करता है प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर

कार्यक्रम में HIV/AIDS से बचाव के प्रभावी उपायों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इसमें सुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या ब्लेड के उपयोग से बचने, संक्रमित रक्त के संपर्क से सावधानी, गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य जांच और समय-समय पर HIV टेस्ट कराने की सलाह शामिल थी। वक्ताओं ने बताया कि HIV/AIDS का अभी तक पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन एआरटी (Antiretroviral Therapy) के माध्यम से वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। साथ ही यह भी बताया गया कि HIV-positive व्यक्ति को ART उपचार पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त है और सरकार का दायित्व है कि वह मुफ्त या सुलभ ART सेवाएं मुहैया कराए।
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ART उपचार क्यों है HIV मरीजों के लिए जीवनरेखा
कार्यक्रम में HIV and AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि HIV-positive व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव कानूनन अपराध है। उन्हें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं या सार्वजनिक सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। भेदभाव करने पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और सजा तक का प्रावधान है। साथ ही यह भी बताया गया कि HIV संक्रमित व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है और उसकी अनुमति के बिना जानकारी साझा नहीं की जा सकती। कार्यक्रम में हेल्पलाइन नंबर—डीएलएसए का 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, एम्बुलेंस सेवा 108, पुलिस हेल्पलाइन 100/112—की भी जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में अधिकार मित्र (पीएलभी) अरुण रजक, निताई गोराई, सूरज कुमार और नीलेश कुमार उपस्थित रहे।
























