- उभरती अर्थव्यवस्था के साथ रोजगार, पर्यावरण, तकनीक और आंतरिक सुरक्षा पर बढ़ती चुनौतियों को लेकर चेतावनी
- चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, लेकिन चुनौतियों से घिरा भारत
- रोजगार और तकनीक के बदलते समीकरण, पर्यावरण संकट और साइबर सुरक्षा की दोहरी चुनौती
- जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ती चिंता, भारत को वैश्विक शक्ति बनाने में नागरिकों की भूमिका
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता सह झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर गंभीर मंथन करते हुए कहा कि जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बावजूद भारत 2026 के आर्थिक दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार भारत आज आर्थिक, भू-राजनीतिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई जटिल प्रश्नों से जूझ रहा है। एक ओर भारत चार नील मुद्रा वाली अर्थव्यवस्था बनने के करीब है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता और प्रकृति का बदलता मिजाज देश की सहनशीलता की परीक्षा ले रहा है। अमेरिका की रणनीति, टैरिफ शुल्क विवाद और पश्चिमी देशों की संरक्षणवादी नीतियों ने भारतीय निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में भी कड़वाहट दिखाई दे रही है।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका और चुनौतियां
जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्माण और उत्पादन की प्रक्रिया में तेजी जरूर आई है, लेकिन आज भी भारत कच्चे माल और पुर्जों के लिए विदेशी देशों पर निर्भर है। नई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन से पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने चेताया कि आज केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं रह गई है, क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने बाजार के नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। यदि समय रहते युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित नहीं किया गया, तो बेरोजगारी आर्थिक विकास के लाभों को कमजोर कर सकती है। तकनीकी क्रांति ने एक बड़ा कौशल अंतराल पैदा कर दिया है, जहां कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश में हैं जो तकनीक और मशीनों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हों।
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कौशल विकास और रोजगार भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संकट अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में मौसम का मिजाज और अधिक बिगड़ सकता है। जलवायु जोखिम सूचकांक में भारत का शीर्ष दस देशों में होना इस बात का संकेत है कि कृषि और बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं है। बेमौसम बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है। शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य त्रासदी का रूप ले चुका है, जबकि समुद्री जल स्तर में वृद्धि मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय महानगरों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है। इसके साथ ही डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा एक अदृश्य युद्धक्षेत्र बन गई है, जहां डेटा चोरी, साइबर धोखाधड़ी और नकली वीडियो सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि सामाजिक असमानता और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है, जो आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से निर्णायक परीक्षा होगी। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक संतुलन केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और रोजगार के माध्यम से पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा में लाकर ही संभव है। वर्तमान समय में वैश्विक युद्धों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव भारत पर पड़ना स्वाभाविक है। हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अंत में उन्होंने कहा कि यदि भारत रोजगारपरक अर्थव्यवस्था, सुरक्षित सीमाएं और पर्यावरण के प्रति सजग नीति अपनाता है, तो निश्चित रूप से भारत एक मजबूत वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा। इसमें सभी नागरिकों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
























