डीएवी संस्थानों के 185 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण, बेहतर अध्यापन और मानसिक स्वास्थ्य पर हुई विस्तृत चर्चा
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन, मानसिक स्वास्थ्य को बताया शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता
शिक्षा के माध्यम से बदल सकता है वर्तमान परिवेश, कार्यक्रम की सफलता में शिक्षकों और प्राचार्यों की रही अहम भूमिका
डीएवी संस्थानों में शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से शिक्षा गुणवत्ता को मिलेगा बढ़ावा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : डीएवी सेंटर ऑफ एकेडमिक एक्सीलेंस, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का समापन 13 मई को एनआईटी आदित्यपुर (जमशेदपुर) के सभागार में संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड एल जोन जमशेदपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले डीएवी गुवा, डीएवी चिड़िया, डीएवी झींकपानी, डीएवी नोवामुंडी एवं एनआईटी आदित्यपुर के करीब 185 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, विद्यार्थियों के मानसिक विकास और प्रभावशाली अध्यापन तकनीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों के शिक्षकों को अलग-अलग समूहों में विभाजित कर एक्सपर्ट मास्टर ट्रेनरों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों ने इसे अत्यंत लाभदायक और शिक्षाप्रद बताया।
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शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बढ़ती भूमिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड एल जोन जमशेदपुर संभाग की सहायक रीजनल ऑफिसर सुश्री रेखा कुमारी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों और अभिभावकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षकों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है, क्योंकि शिक्षक ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन व्यक्ति के दिमाग और दिल दोनों को मजबूत बनाता है। यदि मानसिक स्थिति मजबूत होगी तो इच्छा शक्ति भी सशक्त होगी और उसका प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देगा। उन्होंने प्रेरक कविताओं और उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आज के दौर में तनाव, सामाजिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण शिक्षक भी मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए उन्हें समय-समय पर मानसिक रूप से सशक्त बनाना आवश्यक है।
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शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शिक्षा जगत में बढ़ी जागरूकता
सहायक रीजनल ऑफिसर रेखा कुमारी ने अपने संबोधन में भूटान, फिनलैंड और भारतीय समाज में खुश रहने की प्रवृत्ति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति अक्सर दूसरों की खुशी देखकर स्वयं दुखी हो जाता है, जबकि मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष और सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों का ज्ञान स्तर पहले की तुलना में अधिक व्यापक है, इसलिए शिक्षकों को भी अपने ज्ञान और अध्यापन शैली को लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों के भीतर शिक्षा को प्रभावी ढंग से रूपांतरित करने और उन्हें सरल तरीके से समझाने की कला में निपुण बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से वर्तमान सामाजिक परिवेश को बदला जा सकता है और शिक्षक इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण सूत्रधार हैं।
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नई शिक्षण तकनीकों के जरिए विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने पर जोर
कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम की मॉनिटरिंग डीएवी चिड़िया के प्राचार्य देवेंद्र कुमार पाणिनि, डीएवी झींकपानी के प्राचार्य विवेकानंद घोष, डीएवी नोवामुंडी की प्राचार्या शशिकला तथा डीएवी गुवा के प्राचार्य प्रवीण कुमार ने की। कार्यक्रम के सफल संचालन में डीएवी एनआईटी आदित्यपुर के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर ज्योति कुमारी, वृजेश पाण्डेय, विनोद कुमार साहू, इन्द्रजीत गांधी, कौसिक चटर्जी, अशोक कुंटिया, अभय कुमार सिन्हा, सुधा रानी, श्रुति शर्मा, संदीप पात्रा, राकेश कुमार मिश्रा, समीर कुमार प्रधान, श्रवण कुमार पाण्डेय, जय मंगल साव, पुष्पांजलि नायक, अनिरुद्ध दत्ता, अंजन सेन, रंजना प्रसाद, प्रिया कुमारी गुप्ता, योगेश कुमार महतो, उत्कर्ष शर्मा, विकास कुमार मिश्रा, ज्योति गिरी, विवेकानंद कुंडू, सुष्मिता महतो, पम्मी कुमारी, देवब्रत चक्रवर्ती, पंकज रोहतिगी, प्रीति कुमारी और रांबिनी अधिकारी सहित कई शिक्षक उपस्थित थे।