- प्रभात फेरी, ध्वजारोहण और ‘वीणापाणि चैंपियंस ट्रॉफी’ ने जगाई क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना
जेबी लाइव, रिपोर्टर
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक और उत्साह से भरा रहा, जब क्षेत्र की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था ‘वीणापाणि पाटागार’ ने अपने स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने का भव्य उत्सव मनाया। सुबह की पहली किरण के साथ ही बहरागोड़ा बाजार और आसपास के इलाकों में प्रभात फेरी की गूंज सुनाई दी। कालीबाड़ी स्थित पाटागार प्रांगण से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा, छात्र और संस्था के सदस्य शामिल हुए। केसरी और सांस्कृतिक रंगों से सजी यह यात्रा पीडब्ल्यूडी मोड़ से गुजरते हुए वीणापाणि स्टेडियम तक पहुंची। रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर और तालियों के साथ इस सांस्कृतिक यात्रा का स्वागत किया। यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बहरागोड़ा की 90 साल पुरानी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत की जीवंत झलक बन गया।
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प्रभात फेरी में झलकी 90 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत
समारोह का मुख्य आकर्षण पाटागार परिसर में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम रहा। इस अवसर पर झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिनेश षाड़ंगी ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वीणापाणि पाटागार केवल एक संस्था नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की बौद्धिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 90 वर्षों तक निरंतर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना किसी भी संस्था के लिए गर्व की बात है। डॉ. षाड़ंगी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएं और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। उनके संबोधन के दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया और संस्था के योगदान को सराहा।
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ध्वजारोहण के साथ क्षेत्रीय गौरव का संदेश
सांस्कृतिक आयोजनों के साथ-साथ खेल के मैदान में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। वीणापाणि स्टेडियम में सुबह 10 बजे से ‘वीणापाणि चैंपियंस ट्रॉफी’ का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एक दिवसीय इस प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं था, बल्कि युवाओं में खेल भावना, एकजुटता और प्रतिभा को मंच देना भी था। मैदान में खिलाड़ियों के बीच कड़े मुकाबले ने दर्शकों का उत्साह और बढ़ा दिया। संस्था के सदस्यों ने इस अवसर पर कहा कि 90 साल पुरानी इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समाज के हर वर्ग को साथ आना होगा। यह उत्सव इस बात का प्रमाण है कि बहरागोड़ा आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती से जुड़ा हुआ है।



























