गरीब छात्रों के लिए आरक्षित सीटों पर संपन्न परिवारों के बच्चों के नामांकन का आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों पर कथित अनियमितताओं को लेकर युवा जदयू ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले में आरटीई के तहत आरक्षित लगभग 2300 सीटों पर पात्र गरीब छात्रों के बजाय संपन्न परिवारों के बच्चों का नामांकन कराया जा रहा है। संगठन का दावा है कि शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी, जो लंबे समय से एक ही जिले और एक ही कार्य से जुड़े हुए हैं, इस प्रक्रिया में संलिप्त हो सकते हैं। युवा जदयू ने कहा कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो गरीब और जरूरतमंद बच्चों के अधिकारों का हनन जारी रहेगा।
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पहली और दूसरी लॉटरी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ज्ञापन में आरटीई नामांकन प्रक्रिया के कई बिंदुओं पर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रथम लॉटरी में कई विद्यालयों की आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों को पूरी तरह नहीं भरा गया, जिसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही आरोप लगाया गया कि पहली सूची जारी होने के बाद खाली सीटों के अनुरूप दूसरी सूची तैयार करने के बजाय विभाग द्वारा अभिभावकों को पुनः विद्यालय चयन का विकल्प दिया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हुई। संगठन के अनुसार यदि किसी विद्यालय में पहली लॉटरी के बाद केवल तीन सीटें खाली थीं, तो दूसरी प्रक्रिया में उन्हीं सीटों के लिए पात्र छात्रों का चयन होना चाहिए था, लेकिन नए आवेदनों के कारण उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई। इससे चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं और कथित रूप से कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की आशंका व्यक्त की गई है।
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आय प्रमाण पत्र और ऑनलाइन पोर्टल को लेकर भी आपत्ति
युवा जदयू ने यह भी आरोप लगाया है कि आरटीई नामांकन में उपयोग किए गए आय प्रमाण पत्रों की सत्यता पर भी सवाल हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि अंचल कार्यालय स्तर पर आय प्रमाण पत्रों का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया, तो 72 हजार रुपये वार्षिक आय सीमा वाले प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किए गए, इसकी जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा संगठन ने दावा किया कि द्वितीय लॉटरी से पहले ऑनलाइन पोर्टल पर जिन विद्यालयों के नाम उपलब्ध नहीं थे, उनमें भी कथित रूप से नामांकन कराया गया। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए संबंधित कर्मियों को हटाने और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई है।
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कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और जनहित याचिका की चेतावनी
युवा जदयू नेता हेमंत पाठक ने कहा कि चाहे नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, दोनों ही परिस्थितियों में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वर्ष की लॉटरी प्रक्रिया में कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जो जांच की मांग करती हैं। संगठन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी कई जानकारियां मांगी हैं और दावा किया है कि उनके पास अनियमितताओं से जुड़े कई दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। हेमंत पाठक ने मांग की कि इस वर्ष की लॉटरी प्रक्रिया को निरस्त कर नई प्रक्रिया के तहत पुनः लॉटरी कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो शिक्षा विभाग के कार्यालय के बाहर आंदोलन किया जाएगा। साथ ही मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने के लिए कानूनी सलाह भी ली जा रही है। ज्ञापन सौंपने के दौरान राहुल गुप्ता, मंटु सतुआ, जय प्रकाश साव, शुभम मिश्रा, हैप्पी कुमार, रितेश पांडेय समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।