किरीबुरू अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव और खदानों में मोबाइल प्रतिबंध का मुद्दा उठा
रामा पांडेय ने दी व्यापक आंदोलन की चेतावनी, मांगें पूरी नहीं हुईं तो संयुक्त श्रमिक यूनियनें करेंगी आंदोलन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के निदेशक (खान) विकास मनवाटी ने मेघाहातुबुरू जनरल ऑफिस के कॉन्फ्रेंस हॉल में विभिन्न श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक की। बैठक में मजदूरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रबंधन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिए जाने से श्रमिक नेताओं में असंतोष देखने को मिला। बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन प्रतिनिधियों ने अस्पताल में सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के साथ वर्षों से बंद ब्लड बैंक तथा रेफरल सुविधा से जुड़ी परेशानियों को सामने रखा। इस पर प्रबंधन ने कहा कि डॉक्टर यहां आने के इच्छुक नहीं हैं। प्रबंधन के इस जवाब से श्रमिक प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हुए।
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किरीबुरू सेल अस्पताल की बदहाली पर श्रमिक यूनियनों ने उठाए सवाल
बैठक में टाउनशिप की जर्जर सड़कों और सेल कर्मचारियों के पुराने आवासों की मरम्मत का मुद्दा भी उठाया गया। श्रमिक प्रतिनिधियों ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति से कर्मचारियों और उनके परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। निदेशक (खान) ने सड़क निर्माण और आवास संबंधी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, लंबे समय से खाली पड़े सेल आवासों को किराये पर उपलब्ध कराने की मांग प्रबंधन ने स्वीकार नहीं की। इसके अलावा, श्रमिकों ने करीब 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव और रिवॉर्ड भुगतान का मामला उठाते हुए देरी पर सवाल किए। लेकिन प्रबंधन की ओर से भुगतान के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई और न ही इस संबंध में ठोस घोषणा की गई। इससे कर्मचारियों में निराशा बनी रही।
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15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव भुगतान पर श्रमिकों को नहीं मिला ठोस आश्वासन
श्रमिक यूनियनों ने बाहर इलाज कराने के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा और वातानुकूलित शव वाहन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा। प्रबंधन ने इन मांगों पर विचार करने की बात कही, लेकिन तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, खदानों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा भी बैठक में चर्चा का विषय बना रहा। श्रमिक प्रतिनिधियों ने इस प्रतिबंध को लेकर अपनी आपत्ति जताई, जबकि प्रबंधन ने सुरक्षा और शून्य दुर्घटना के लक्ष्य का हवाला देते हुए प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया। इन मुद्दों पर स्पष्ट समाधान नहीं निकलने से बैठक में शामिल श्रमिक नेताओं की नाराजगी और बढ़ गई।
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ठेका श्रमिकों के मोबाइल प्रतिबंध पर कायम रहा सेल प्रबंधन
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक को असफल बताते हुए कहा कि मजदूरों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रबंधन का रवैया सकारात्मक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, लंबित इंसेंटिव और कर्मचारियों की अन्य बुनियादी समस्याओं का समाधान लंबे समय से नहीं हो पा रहा है। केवल आश्वासन देने से मजदूरों की परेशानियां दूर नहीं होंगी। रामा पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने श्रमिकों की मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाया, तो संयुक्त श्रमिक यूनियनों के माध्यम से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक के बाद अब श्रमिकों की निगाहें प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।























