- जमशेदपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन एवं राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का आयोजन
- डायन प्रथा, नशा, ट्रैफिकिंग और पलायन जैसे सामाजिक मुद्दों पर न्यायिक जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जमशेदपुर द्वारा सिदगोड़ा टाउन हॉल में राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन और राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं कार्यकारी अध्यक्ष सह एडमिनिस्ट्रेटिव जज (जमशेदपुर जजशिप) न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और सदस्य सचिव झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री रंजना अस्थाना उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय, उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आर एन दास समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। मुख्य अतिथि ने धनबाद और रांची डालसा द्वारा आयोजित नेशनल लोक अदालत की वर्चुअल जानकारी ली और जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
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न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि लोक अदालत विवादों के निपटारे का एक न्यायिक मंच है। आजकल जमीन, बैंक, बिजली बिल या अन्य मामलों में विवाद सामान्य हो गया है। लोक अदालत में आपसी समझौते के माध्यम से केसों का निपटारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं का लाभ यदि लोगों तक नहीं पहुंचे तो उनका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। इसलिए योजनाओं के प्रचार-प्रसार और न्यायिक जागरूकता के लिए पंचायतों में पारा लीगल वॉलंटियर्स (अधिकार मित्र) लगाए गए हैं, जो वंचित एवं पीड़ित लोगों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
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न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने डायन प्रथा को कुरीति बताते हुए कहा कि इसकी आड़ में निर्दोष लोगों की हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने जागरूकता को इस प्रथा को रोकने का सबसे कारगर उपाय बताया। साथ ही नशा कारोबार पर रोक लगाने की भी अपील की और कहा कि आजकल नशा का प्रचलन बढ़ रहा है, जिससे कई दुष्प्रभाव उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने ट्रैफिकिंग और बच्चों के गायब होने की गंभीर समस्या पर भी चिंता व्यक्त की। इसके अलावा पलायन और दुष्कर्म जैसी सामाजिक चुनौतियों पर न्यायिक दृष्टिकोण से समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
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न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंचाना सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने पूर्वी सिंहभूम जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां आवंटित राशि का 80-90 प्रतिशत खर्च कर योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने पारा लीगल वॉलंटियर्स (अधिकार मित्र) के योगदान की सराहना की, जो कोर्ट में चल रहे मामलों में लोगों को न्याय दिलाने में सहायक बन रहे हैं। कार्यक्रम का स्वागत भाषण झालसा की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना ने दिया। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने जिले में योजनाओं की प्रगति और क्रियान्वयन की जानकारी साझा की।
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राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर में 1030 लाभुकों के बीच कुल 33 करोड़, 43 लाख, 13 हजार 34 रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मंच पर 12 लाभुकों को सांकेतिक रूप से वितरण किया। इसके अलावा दुर्घटना के 9 क्लेम चेक पीड़ित परिवार को प्रदान किए गए। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा 18 स्टॉल लगाए गए, जिनमें जेएसएलपीएस, कल्याण विभाग, समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, उद्यान विभाग, सहकारिता, गब्य, पशुपालन, मत्स्य, स्वास्थ्य, श्रम विभाग, डीआरडीए, डीएलएए और आधार केंद्र शामिल थे।
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कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि समेत सभी गणमान्य लोग व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचे, जहां पौधारोपण कर स्वच्छ वातावरण का संदेश दिया। इसके बाद नेशनल लोक अदालत के सभी बेंचों का निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जमशेदपुर के सचिव कुमार शौरव त्रिपाठी ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में कुल 2,90,458 मामलों का निपटारा हुआ, जिसमें 46,60,31,946 रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई। इसमें 12,266 कोर्ट केस और 2,78,192 प्रीलिटिगेशन केस शामिल थे। लंबित मामलों के निपटान के लिए जमशेदपुर कोर्ट में 13 बेंच और घाटशिला अनुमंडल कोर्ट में 3 बेंच गठित की गई थीं। इस आयोजन ने न्यायिक जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक कुरीतियों को रोकने और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






















