पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप—भारत में सत्ता परिवर्तन बैलेट से होता है, बंदूक या अराजकता से नहीं
‘वोट चोरी’ अभियान और कांग्रेस-वामपंथी राजनीति पर साधा निशाना
रघुवर दास बोले- लोकतंत्र की ताकत संविधान और जनता के मताधिकार में
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान और रेजीम चेंज यानी सत्ता व्यवस्था बदलने की कथित कोशिशों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता संविधान और मतपत्र से होकर गुजरता है, न कि बंदूक, हिंसा या अराजकता से। रघुवर दास के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को ठोस प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करना और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान खोजना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल नारों और आरोपों के सहारे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। भारत के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी की सरकार का अंत भी चुनाव के माध्यम से हुआ था। उनके मुताबिक, देश में सत्ता का अंतिम फैसला जनता करती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती संविधान तथा मतदाताओं के विश्वास पर निर्भर करती है।
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रघुवर दास का राहुल गांधी पर हमला, कहा- भारत में बैलेट से बदलती है सत्ता
रघुवर दास ने कम्युनिस्ट विचारधारा और वामपंथी राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि देश की जनता ने ऐसी राजनीति को लगातार नकारा है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्टों की भूमिका का उल्लेख करते हुए वामपंथी दलों की आलोचना की। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलवाद की ताकत कमजोर हुई है। उनके अनुसार, नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा ने देश के कई क्षेत्रों में विकास तथा शांति के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली हिंसक प्रवृत्तियों का विरोध जरूरी है। हालांकि, लोकतांत्रिक विरोध और हिंसा के बीच अंतर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विपक्षी आंदोलनों की मंशा पर सवाल उठाते हुए उनके एजेंडे और वित्तीय स्रोतों को लेकर स्पष्टता की मांग की।
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नक्सलवाद और वामपंथी राजनीति पर रघुवर दास का निशाना, लोकतंत्र की मजबूती पर दिया जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ नारे, शाहीन बाग आंदोलन और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राजनीतिक चुनौतियों का सामना धैर्य और दूरदर्शिता से किया है। रघुवर दास ने एसआईआर को चुनावी प्रक्रिया और देश की संप्रभुता मजबूत करने से जोड़ते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करना लोकतंत्र के महत्वपूर्ण पहलू हैं। उन्होंने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ अभियान की तुलना पूर्व में लगाए गए ‘चौकीदार चोर है’ नारे से करते हुए कहा कि यह अभियान भी जनता के बीच प्रभाव खो देगा। उनके बयान में केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के नेतृत्व के प्रति समर्थन भी स्पष्ट दिखाई दिया।
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एसआईआर और ‘वोट चोरी’ अभियान पर रघुवर दास का बयान, चुनावी पारदर्शिता पर चर्चा तेज
रघुवर दास ने अपने बयान में कथित रेजीम चेंज की कोशिशों के पीछे विदेशी शक्तियों और चरमपंथी तत्वों की भूमिका होने के आरोप भी लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अचानक बढ़े फॉलोअर्स और आंदोलनों की फंडिंग को लेकर सवाल उठाए, हालांकि इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए। उन्होंने फ्रांस में हुए दंगों का भी उल्लेख किया और कहा कि देश में किसी भी तरह की हिंसक या अराजक गतिविधि को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हावी नहीं होने देना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही जनता के प्रति होती है। चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की जांच प्रमाणों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर होनी चाहिए, जबकि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। रघुवर दास ने अंत में दोहराया कि भारत में सत्ता परिवर्तन का वैध माध्यम चुनाव है और देश की लोकतांत्रिक ताकत संविधान, जनता के विश्वास तथा मतपत्र में निहित है।
























