29 पुराने श्रम कानून समाप्त, वेतन, सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों में बड़े सुधार
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : भारत सरकार ने देश में श्रम सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार नए लेबर कोड्स को पूरी तरह लागू कर दिया है। इसके साथ ही पहले से लागू 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने इसका आधिकारिक ऐलान गजट अधिसूचना के माध्यम से किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य मजदूरों और कंपनियों दोनों के लिए कानूनों को सरल, पारदर्शी और एक समान बनाना है, ताकि अनुपालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के बाद लगभग 5 वर्षों में यह सुधार लागू हुआ है। शुरुआत 21 नवंबर 2025 को हुई थी, लेकिन नियमावली पूरी नहीं होने के कारण पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाए थे। अब सभी आवश्यक नियम तय कर दिए गए हैं और देशभर में एक साथ लागू कर दिए गए हैं।
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श्रम कानूनों में समान वेतन, महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच पर जोर
नए लेबर कोड के तहत सबसे बड़ा बदलाव समान कार्य के लिए समान वेतन को लेकर किया गया है। अब एक ही तरह का काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों को बराबर वेतन मिलेगा, जिससे भेदभाव की संभावना खत्म होगी। इसके अलावा महिलाओं को मातृत्व के बाद 26 सप्ताह की छुट्टी का प्रावधान किया गया है, ताकि वे अपने और नवजात शिशु की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें। आवश्यकता पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी दी जा सकेगी। साथ ही 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए हर साल एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है, जिससे बीमारियों का समय पर पता लगाया जा सके।
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कर्मचारियों के कौशल विकास और रोजगार सुरक्षा पर विशेष ध्यान
नए नियमों में सरकार ने नेशनल री-स्किलिंग फंड की भी व्यवस्था की है, जिसके तहत नौकरी जाने पर कर्मचारियों को नई तकनीकी ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य बनाया जाएगा। इससे बेरोजगारी की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही वेतन संरचना और पीएफ नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे टेक-होम सैलरी और कटौतियों के ढांचे में बदलाव देखने को मिलेगा। कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने के लिए समय दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये बदलाव न केवल श्रमिकों के हित में हैं, बल्कि उद्योग और निवेश माहौल को भी बेहतर बनाएंगे।
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सरलीकरण से बढ़ेगा निवेश और रोजगार के नए अवसर
सरकार का मानना है कि पहले 29 अलग-अलग श्रम कानूनों के कारण नियम जटिल और कठिन थे, जिससे कंपनियों को अनुपालन में दिक्कत होती थी। नए लेबर कोड इन सभी नियमों को सरल और एकीकृत करते हैं, जिससे व्यापार करना आसान होगा। इससे देश में निवेश बढ़ने की संभावना है और नई कंपनियों के आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार भारत के श्रम बाजार को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
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कौन से बड़े नियम बदलेंगे?
- नए लेबर कोड महिलाओं और काम करने वाले लोगों के फायदे के लिए लाया गया है। अब अगर पुरुष और महिला एक जैसा काम करते हैं, तो दोनों को एक ही जितनी सैलरी मिलेगी। इससे किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
- महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद अब 26 हफ्ते की छुट्टी मिलेगी, जिससे वो आराम से अपनी और बच्चे की देखभाल कर सकें। साथ ही जरूरत पड़ने पर महिलाएं घर से काम भी कर सकेंगी।
- इसके अलावा, नए लेबर कोड के अनुसार 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के सभी कर्मचारियों की हर साल एक बार मुफ्त मेडिकल जांच होगी, जिससे बीमारी का पता समय रहते चल सके।
- सरकार ने नेशनल री स्किलिंग फंड फंड बनाया है, जिससे लोग नई तकनीक सीख सकें। अगर किसी की नौकरी चली जाती है, तो ये फंड उसे नई ट्रेनिंग दिलाएगा, जिससे वो फिर से काम पा सके।
- नए लेबर कानून आने से सैलरी और पीएफ के नियम बदलेंगे। यानी अब सैलरी में डिडक्शन और हाथ में मिलने वाला पैसा थोड़ा अलग हो सकता है। कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने के लिए समय दिया है। आगे चलकर ये नियम हर तरह के कर्मचारियों चाहे वो दफ्तर में काम करते हों या बाहर सभी के लिए एक समान बनेंगे।























