- किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ छोटानागपुर स्तरीय जन आक्रोश जत्था का समापन, बृंदा कारात ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मुरी : बुंडू क्षेत्र में माकपा द्वारा आयोजित जन आक्रोश सभा में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई और 24 मार्च को दिल्ली में प्रस्तावित विशाल रैली को सफल बनाने का आह्वान किया गया। 7 मार्च से 10 मार्च तक चले छोटानागपुर स्तरीय जन आक्रोश जत्था का समापन शहीद लक्ष्मी कांत स्वासी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया। इसके बाद पूर्व माकपा पोलिट ब्यूरो सदस्य और पूर्व सांसद बृंदा कारात के नेतृत्व में टांगरटोली से एक विशाल रैली निकाली गई। रैली में शामिल लोगों ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया और बुंडू नगर होते हुए धुर्वा मोड़ स्थित शहीद बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद धुर्वा मोड़ में सुरेश मुंडा की अध्यक्षता में जन आक्रोश सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, महिलाएं और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।
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बृंदा कारात ने केंद्र सरकार की नीतियों पर बोला हमला
सभा को संबोधित करते हुए माकपा की वरिष्ठ नेता बृंदा कारात ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश के किसान-मजदूरों के हितों को कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेच दिया है। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को शून्य प्रतिशत आयात शुल्क पर खोल दिया गया है, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। यह व्यवस्था भारतीय किसानों और देश की संप्रभुता के लिए घातक साबित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चार लेबर कोड, बिजली विधेयक, बीज कानून और मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के किसान-मजदूर 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली में अपनी ताकत दिखाएंगे।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और युद्ध के खिलाफ भी उठी आवाज
सभा के दौरान बृंदा कारात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का समर्थन करना भारत की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ईरान में छात्राओं की मौत की घटना के खिलाफ दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और भारत के लोगों को भी युद्ध के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण की नीतियां आम जनता को प्रभावित कर रही हैं। सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों को कर में छूट दी जा रही है, जबकि घरेलू गैस पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पेशा नियमावली की अनदेखी कर कई जगहों पर बिना ग्राम सभा की अनुमति के जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण समुदाय प्रभावित हो रहे हैं।
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नेताओं ने दिल्ली रैली को ऐतिहासिक बनाने का किया आह्वान
सभा को माकपा राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुफल महतो और सुरेश मुंडा समेत कई नेताओं ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 7 से 10 मार्च तक छोटानागपुर और संथाल परगना में निकाले गए जन आक्रोश जत्था को किसानों और मजदूरों का व्यापक समर्थन मिला है। नेताओं ने 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली में किसान, मजदूर, आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। सभा में चार लेबर कोड रद्द करने, बिजली और बीज विधेयक वापस लेने, मनरेगा को मजबूत करने, किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने, जबरन जमीन अधिग्रहण रोकने और जल-जंगल-जमीन पर कॉरपोरेट कब्जा खत्म करने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम के अंत में जिला कमिटी सदस्य रंजीत मोदक ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर समीर दास, प्रफुल्ल लिंडा, रंगोवती, दिवाकर मुंडा, मदुवा कच्छप, अमल आजाद सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और महिलाएं मौजूद थीं।























