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Manoharpur : मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मरीज परेशान

  • भाजपा नेत्री सुशीला टोप्पो ने सांसद, विधायक और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
  • एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सक और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
  • सारंडा के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की मांग, प्रशासन से ठोस पहल का आग्रह

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं इसके अंतर्गत संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं, आवश्यक संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण क्षेत्र के मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर सारंडा के सुदूरवर्ती एवं दुर्गम इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव गंभीर समस्या बन गया है। आनंदपुर, छोटानागरा और जराईकेला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कई आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस स्थिति को लेकर भाजपा नेत्री सुशीला टोप्पो और स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने स्थानीय सांसद, विधायक तथा जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मनोहरपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।

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मनोहरपुर में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से ग्रामीण परेशान, सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी

मनोहरपुर सीएचसी की सबसे बड़ी समस्याओं में एंबुलेंस व्यवस्था और आवश्यक जांच सुविधाओं का अभाव शामिल है। सुशीला टोप्पो एवं स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था बेहद दयनीय स्थिति में है। वहीं, मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। बताया गया कि करीब तीन वर्ष पूर्व सीएचसी मनोहरपुर को अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण मशीन का समुचित उपयोग नहीं हो सका। हाल ही में उक्त मशीन को सदर अस्पताल चाईबासा स्थानांतरित कर दिया गया। इससे गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए दूसरे अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इसके अलावा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और संचालन के लिए सरकारी वाहन भी उपलब्ध नहीं है। उन्हें सारंडा सहित मनोहरपुर सीएचसी के अंतर्गत आने वाले आनंदपुर, छोटानागरा, जराईकेला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा 27 अन्य उप स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण और संचालन करना पड़ता है। सरकारी वाहन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी भी प्रभावित होने की आशंका है।

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अल्ट्रासाउंड मशीन चाईबासा स्थानांतरित, मनोहरपुर के मरीजों की बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों ने बताया कि मनोहरपुर सीएचसी में 30 से 40 बेड की क्षमता होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। टीबी, डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों की समय पर पहचान के लिए अस्पताल में बेहतर प्रयोगशाला व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए पैथोलॉजिस्ट, लैब टेक्नीशियन और पीएलटी कर्मियों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति की मांग की गई है। वहीं, आनंदपुर, छोटानागरा और जराईकेला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता के बावजूद एंबुलेंस और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सारंडा के दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। समय पर जांच और उपचार की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त संसाधनों से लैस करना बेहद जरूरी है।

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30 से 40 बेड वाले अस्पताल में जांच सुविधाओं की कमी, लैब स्टाफ की नियुक्ति की मांग

अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सीएचसी में सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञ की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके कारण प्रसव, ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों से जुड़े मामलों में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के उपचार में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अस्पताल में ब्लड स्टोरेज की सुविधा भी नहीं है। क्षेत्र में मोतियाबिंद और अन्य नेत्र रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन थियेटर (आई ओटी) स्थापित करने की आवश्यकता जताई गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन सुविधाओं की उपलब्धता से ग्रामीण मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से मरीज रेफर, मनोहरपुर में ब्लड स्टोरेज और आई ओटी की मांग

इसके साथ ही मनोहरपुर क्षेत्र में 104 और 108 एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एंबुलेंस सेवाएं प्रभावित रहने और वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने के दौरान भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। भाजपा नेत्री सुशीला टोप्पो एवं स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने मनोहरपुर सीएचसी सहित आनंदपुर, छोटानागरा और जराईकेला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सक, लैब स्टाफ, अल्ट्रासाउंड जांच और सुचारु एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि सारंडा जैसे दुर्गम क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को भी बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को केवल आश्वासन देने के बजाय धरातल पर ठोस पहल करनी होगी।

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Novamundi : नोवामुंडी में बाइक और स्कूटी की जोरदार टक्कर, महिला कर्मी समेत दो गंभीर

वीटी सेंटर चौक के पास हुआ हादसा, दोनों घायल बेहोशी की हालत में मिले प्राथमिक उपचार के बाद जमशेदपुर टीएमएच

  • वीटी सेंटर चौक के पास हुआ हादसा, दोनों घायल बेहोशी की हालत में मिले
  • प्राथमिक उपचार के बाद जमशेदपुर टीएमएच रेफर
  • वीटी सेंटर चौक पर दुर्घटना के बाद पुलिस ने जब्त किए बाइक और स्कूटी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

नोवामुंडी : पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी में सोमवार सुबह टाटा स्टील के वीटी सेंटर चौक के पास बाइक और स्कूटी के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस सड़क दुर्घटना में टाटा स्टील की महिला कर्मी सुषमा सांडिल और बाइक सवार युवक जगमोहन जेराई गंभीर रूप से घायल हो गए। जगमोहन जेराई जोजो कैंप का निवासी बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों वाहनों के बीच टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक और स्कूटी सवार सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए। हादसे के बाद दोनों घायल सड़क के बीच गंभीर अवस्था में पड़े थे। दुर्घटना देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और तत्काल घायलों की मदद में जुट गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर एंबुलेंस पहुंची, जिसके माध्यम से दोनों घायलों को नोवामुंडी टीएमएच अस्पताल ले जाया गया।

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नोवामुंडी में सड़क हादसा, बाइक-स्कूटी की टक्कर में दो लोग गंभीर रूप से घायल

जानकारी के अनुसार, सुषमा सांडिल संग्रामसाई से स्कूटी पर सवार होकर अपनी ड्यूटी के लिए निकली थीं। इसी दौरान जोजो कैंप की ओर से जगमोहन जेराई बाइक से नोवामुंडी बाजार की तरफ जा रहा था। बताया जाता है कि वीटी सेंटर चौक के पास दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों को गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। नोवामुंडी टीएमएच में चिकित्सकों ने दोनों का प्राथमिक उपचार किया। हालांकि, उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर स्थित टीएमएच रेफर कर दिया गया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर कुछ समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

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संग्रामसाई से ड्यूटी जा रही महिला कर्मी हादसे में घायल, जमशेदपुर रेफर

घटना की सूचना मिलते ही नोवामुंडी थाना पुलिस दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटना की जानकारी ली। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बाइक और स्कूटी को जब्त कर थाने ले गई। इसके बाद पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी है। हादसे में तेज रफ्तार की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर वीटी सेंटर चौक के आसपास सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की सतर्कता का सवाल खड़ा कर दिया है।

Gua : सेल गुवा की पहल : 10 गांवों की बेटियां चिकित्सा क्षेत्र में बनाएंगी करियर, दो वर्षीय प्रशिक्षण के लिए राउरकेला रवाना

सीएसआर के तहत एएनएम और डीएमएलटी का मिलेगा प्रशिक्षण सीजीएम सी.बी. कुमार ने हरी झंडी दिखाकर छात्राओं की बस को

  • सीएसआर के तहत एएनएम और डीएमएलटी का मिलेगा प्रशिक्षण
  • सीजीएम सी.बी. कुमार ने हरी झंडी दिखाकर छात्राओं की बस को किया रवाना
  • सेल गुवा की पहल से ग्रामीण बेटियां बनेंगी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : सेल की गुवा अयस्क खदान प्रबंधन ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल की है। इसके तहत गुवा सेल के लीज क्षेत्र में आने वाले 10 गांवों की चयनित 10 छात्राओं को चिकित्सा क्षेत्र में दो वर्षीय प्रशिक्षण दिलाने के लिए राउरकेला रवाना किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। चयनित छात्राओं को राउरकेला स्थित डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में दाखिला दिलाया गया है। यहां उन्हें एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफरी) और डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी) से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान छात्राएं चिकित्सा क्षेत्र की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सीखेंगी। इससे उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने का अवसर मिलेगा।

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गुवा सेल की सीएसआर पहल से ग्रामीण बेटियों को मिलेगा चिकित्सा शिक्षा का अवसर

इस अवसर पर गुवा सेल के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) सी.बी. कुमार ने हरी झंडी दिखाकर छात्राओं से भरी बस को राउरकेला के लिए रवाना किया। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। सीएसआर के तहत शुरू की गई इस योजना से गुवा सेल के लीज क्षेत्र के 10 गांवों की छात्राओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। एएनएम प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राएं नर्सिंग और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी हासिल करेंगी, जबकि डीएमएलटी प्रशिक्षण के जरिए मेडिकल लैब में जांच और अन्य तकनीकी कार्यों का कौशल विकसित कर सकेंगी। दो वर्षीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद छात्राओं के लिए अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा प्रयोगशालाओं में रोजगार तथा करियर बनाने के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

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एएनएम और डीएमएलटी प्रशिक्षण से बेटियों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

सेल प्रबंधन की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण बेटियों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद छात्राएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में भी योगदान दे सकेंगी। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह पहल छात्राओं के व्यक्तिगत भविष्य के साथ क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। छात्राओं की रवानगी के मौके पर महाप्रबंधक सुमन कुमार, सीएसआर विभाग के डीजीएम अनिल कुमार सहित सेल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने छात्राओं को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

Seraikela : रंगामाटिया में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती पर विवाद गहराया, ग्रामीणों ने रद्द करने की उठाई मांग

ग्रामसभा में धारा 46 का हवाला देकर बंदोबस्ती को बताया नियमों के विरुद्ध 4 एकड़ 40 डिसमिल जमीन में से

  • ग्रामसभा में धारा 46 का हवाला देकर बंदोबस्ती को बताया नियमों के विरुद्ध
  • 4 एकड़ 40 डिसमिल जमीन में से एक एकड़ आवंटन की निष्पक्ष जांच की मांग
  • सरकारी जमीन को जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए सुरक्षित रखने की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत चमारू पंचायत के रंगामाटिया गांव में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में रविवार को गांव में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सरकारी जमीन की बंदोबस्ती पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया और जिला प्रशासन से तत्काल रद्द करने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, रंगामाटिया गांव के खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 में कुल 4 एकड़ 40 डिसमिल सरकारी जमीन दर्ज है। इसमें से करीब 25 वर्ष पूर्व एक एकड़ जमीन सुसेन महतो के नाम पर बंदोबस्त की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन का आवंटन निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप होना चाहिए। यदि बंदोबस्ती की शर्तों का पालन नहीं किया गया है, तो सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी को उसकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामसभा में उपस्थित लोगों ने एकमत होकर मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कर जमीन को दोबारा सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाए।

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रंगामाटिया में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामसभा में ग्रामीणों ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) की धारा 46 तथा संबंधित बंदोबस्ती नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आवंटित जमीन की निर्धारित शर्तों का पालन होना आवश्यक है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि बंदोबस्ती के बाद निर्धारित अवधि तक जमीन पर खेती या दखल-कब्जा नहीं किया गया हो और अन्य शर्तों का उल्लंघन हुआ हो, तो सक्षम प्राधिकारी को बंदोबस्ती रद्द करने का अधिकार है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मामले में बंदोबस्ती की शर्तों का पालन नहीं किया गया है। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए बंदोबस्ती के मूल दस्तावेजों, आवंटन की शर्तों और जमीन के वर्तमान उपयोग की प्रशासनिक जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की कि करीब 25 वर्ष पहले की गई बंदोबस्ती नियमानुसार थी या नहीं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग गांव के सामुदायिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए होना चाहिए।

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धारा 46 का हवाला देकर ग्रामीणों ने बंदोबस्ती की वैधता पर उठाए सवाल

ग्रामीणों ने बताया कि यह विवाद पहले भी गांव में तनाव का कारण बन चुका है। पूर्व में उक्त सरकारी जमीन पर एक मकान का निर्माण कराया जा रहा था, जिसे ग्रामीणों ने विरोध करते हुए तोड़ दिया था। ग्रामीणों के अनुसार, उसी स्थान पर गांव के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने का प्रस्ताव था। ऐसे में मकान निर्माण शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना है कि गांव में स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधा के लिए जमीन उपलब्ध रहनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सुसेन महतो आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति हैं। उनके पास पहले से कई एकड़ निजी जमीन है और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उनकी निजी कंपनी भी संचालित होती है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव में भूमिहीन और जरूरतमंद लोगों को सरकारी जमीन की आवश्यकता है, तो एक संपन्न व्यक्ति के नाम पर सरकारी जमीन की बंदोबस्ती किस आधार पर की गई। हालांकि, ये सभी आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है।

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उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रस्तावित जमीन पर मकान निर्माण को लेकर पहले भी हुआ था विवाद

ग्रामसभा में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनकी प्रमुख मांग है कि खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 की जमीन से संबंधित सभी राजस्व अभिलेखों, बंदोबस्ती दस्तावेजों और निर्धारित शर्तों की जांच कराई जाए। यदि बंदोबस्ती में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे तत्काल रद्द कर पूरी जमीन को सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में इस जमीन पर उप स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल या अन्य जनकल्याणकारी सरकारी संस्थान का निर्माण कराया जा सकता है। इसके लिए जमीन को विवादमुक्त रखना जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि गांव में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कानूनी या व्यावहारिक बाधा उत्पन्न न हो। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

Seraikela : गम्हरिया थाना परिसर दुष्कर्म मामला: राष्ट्रीय कोल सेना ने राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग

लापरवाह अधिकारियों पर नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की मांग संगठन ने कहा- पीड़िता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा

  • लापरवाह अधिकारियों पर नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की मांग
  • संगठन ने कहा- पीड़िता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
  • पीड़िता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष, जिला पुलिस प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला : गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ दुष्कर्म के मामले को लेकर राष्ट्रीय कोल सेना का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए अब महामहिम राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। इसमें पीड़ित महिला की गरिमा, सुरक्षा और न्याय के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय कोल सेना ने मांग की है कि मामले में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे घटनाक्रम में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाएं पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और दोषियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

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गम्हरिया थाना दुष्कर्म मामले में राष्ट्रीय कोल सेना ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले आला अधिकारियों पर ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, जो भविष्य के लिए नजीर बने। कार्रवाई का संदेश पुलिस प्रशासन के प्रत्येक स्तर तक पहुंचना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय कोल सेना की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मामले को लेकर आगे की रणनीति और विरोध के स्वरूप पर चर्चा की गई। बैठक में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष विष्णु बानरा ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केवल प्रत्यक्ष आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे घटनाक्रम में जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध या लापरवाहीपूर्ण रही है, उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, राष्ट्रीय कोल सेना ने बनाई आंदोलन की रणनीति

इस अवसर पर संगठन के प्रधान सचिव कोल झारखंड बोदरा भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशासनिक लचरता पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक इस मामले में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और जिला पुलिस प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती, तब तक संगठन का न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है, जिसमें आम नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि हो। राष्ट्रीय कोल सेना ने राष्ट्रपति से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित कराने की मांग की है। संगठन ने संकेत दिया कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने तक वह इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा।

Dumaria : सड़क-पुल की मांग पर डुमरिया में ग्रामीणों का उबाल, दुखनी सोरेन के नेतृत्व में प्रखंड मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण की मांग जर्जर सड़कों की मरम्मत और जमीन मुआवजे को लेकर

  • हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण की मांग
  • जर्जर सड़कों की मरम्मत और जमीन मुआवजे को लेकर सौंपा विरोध संदेश
  • बीडीओ-सीओ की अनुपस्थिति पर भड़के ग्रामीण, कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी
  • मांगें पूरी नहीं हुईं तो बीडीओ-सीओ कार्यालय में तालाबंदी करेंगे डुमरिया के ग्रामीण

जेबी लाइव, रिपोर्टर

डुमरिया : वर्षों से सड़क, पुल और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे डुमरिया प्रखंड के ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी एवं समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा जरूरी स्थानों पर पुल-पुलियों के निर्माण की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई गांव आज भी बेहतर सड़क संपर्क से वंचित हैं। बरसात के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों से कट जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों पर पड़ता है। लोगों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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डुमरिया में सड़क-पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने निकाली विशाल रैली

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने हरेबेड़ा से नरसिंहबहाल को जोड़ने वाली नदी पर पुल निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि पुल के अभाव में दोनों क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जय नदी और शंख नदी पर भी स्थायी पुल निर्माण की मांग की गई। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है। कई बार लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और किसानों के कृषि कार्य भी प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इन तीनों प्रमुख स्थानों पर पुल निर्माण के लिए शीघ्र योजना तैयार कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही छोटी-बड़ी नदियों और नालों पर भी जरूरत के अनुसार पुल-पुलियों का निर्माण कराया जाए, ताकि प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों का संपर्क पूरे वर्ष बना रहे।

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हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल समेत जय और शंख नदी पर पुल निर्माण की मांग तेज

ग्रामीणों ने डुमरिया प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में जर्जर हो चुकी ग्रामीण सड़कों की मरम्मत कराने और सड़क संपर्क से वंचित गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई ग्रामीण सड़कें लंबे समय से खराब स्थिति में हैं, जिससे आवागमन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बारिश के दिनों में सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। इसके अलावा ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के दौरान रैयती जमीन के उपयोग से जुड़े मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि पूर्व में सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई लोगों की निजी जमीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन प्रभावित रैयतों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे सभी मामलों की जांच कराकर प्रभावित जमीन मालिकों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर ग्रामीणों की जमीन का उपयोग करने के बाद उन्हें उनके अधिकार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। सड़क निर्माण और पुल-पुलियों की योजनाओं के साथ जमीन मुआवजे का मामला भी प्राथमिकता से सुलझाया जाना चाहिए।

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जर्जर ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और रैयती जमीन का मुआवजा देने की मांग

प्रदर्शन के दौरान उस समय ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई, जब वे अपनी समस्याएं रखने के लिए प्रखंड मुख्यालय पहुंचे तो बीडीओ और सीओ अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। ग्रामीणों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब क्षेत्र की जनता अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचती है, तब जिम्मेदार अधिकारियों का कार्यालय में मौजूद नहीं रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रखंड मुख्यालय में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को अपने कामों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

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बीडीओ-सीओ की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों में नाराजगी, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा प्रभावित रैयतों को मुआवजा देने की दिशा में जल्द ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने और अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आने पर बीडीओ एवं सीओ कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों का अधिकार हैं। वर्षों से इन सुविधाओं के अभाव में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कार्यों में कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। अब ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की।

Adityapur : छठ और दीपावली को लेकर पुलिस की कार्रवाई, खरकई नदी किनारे मिलीं 300 बोरी अवैध बालू

आदित्यपुर पुलिस ने चार घाटों पर की छापेमारी, बोरियों से बालू निकालकर नदी किनारे बिखेरी अवैध उठाव और भंडारण पर

  • आदित्यपुर पुलिस ने चार घाटों पर की छापेमारी, बोरियों से बालू निकालकर नदी किनारे बिखेरी
  • अवैध उठाव और भंडारण पर निगरानी तेज
  • अवैध बालू कारोबार पर पुलिस की नजर, नदी घाटों पर बढ़ाई गई निगरानी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

आदित्यपुर : आगामी छठ महापर्व एवं दीपावली को देखते हुए आदित्यपुर थाना पुलिस ने अवैध बालू के उठाव और भंडारण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को पुलिस ने खरकई नदी के विभिन्न घाटों पर छापेमारी कर करीब 200 से 300 बोरी में रखी अवैध बालू बरामद की। पुलिस के अनुसार, आदित्यपुर थाना क्षेत्र के सपड़ा, सालडीह बस्ती, जयप्रकाश उद्यान और राम मढ़ैया बस्ती के समीप नदी किनारे बालू से भरी बोरियां लावारिस हालत में रखी मिलीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा खरकई नदी से अवैध रूप से बालू निकालकर बोरियों में भरकर इन स्थानों पर जमा किया गया था। पुलिस ने सभी बोरियों से बालू निकालकर नदी घाट पर ही बिखेर दिया। इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध रूप से बालू के संग्रहण और परिवहन पर रोक लगाना है। त्योहारों के दौरान नदी घाटों पर गतिविधियां बढ़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने विशेष सतर्कता बरती है।

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खरकई नदी के चार घाटों पर पुलिस की छापेमारी, सैकड़ों बोरी बालू बरामद

थाना पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में दोपहिया वाहनों और साइकिल के माध्यम से अवैध रूप से बालू का उठाव करने वाले लोगों पर पिछले कुछ दिनों से लगातार नजर रखी जा रही है। विशेष रूप से सपड़ा, सालडीह बस्ती, राम मढ़ैया बस्ती और जयप्रकाश उद्यान के आसपास के नदी घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि नदी से बालू निकालकर बोरियों में भरने और चोरी-छिपे उसका परिवहन करने की गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। छठ महापर्व के दौरान खरकई नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है, ऐसे में घाटों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध बालू उठाव और भंडारण में संलिप्त लोगों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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