हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण की मांग
जर्जर सड़कों की मरम्मत और जमीन मुआवजे को लेकर सौंपा विरोध संदेश
बीडीओ-सीओ की अनुपस्थिति पर भड़के ग्रामीण, कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी
मांगें पूरी नहीं हुईं तो बीडीओ-सीओ कार्यालय में तालाबंदी करेंगे डुमरिया के ग्रामीण
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : वर्षों से सड़क, पुल और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे डुमरिया प्रखंड के ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी एवं समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा जरूरी स्थानों पर पुल-पुलियों के निर्माण की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई गांव आज भी बेहतर सड़क संपर्क से वंचित हैं। बरसात के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों से कट जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों पर पड़ता है। लोगों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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डुमरिया में सड़क-पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने निकाली विशाल रैली

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने हरेबेड़ा से नरसिंहबहाल को जोड़ने वाली नदी पर पुल निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि पुल के अभाव में दोनों क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जय नदी और शंख नदी पर भी स्थायी पुल निर्माण की मांग की गई। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है। कई बार लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और किसानों के कृषि कार्य भी प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इन तीनों प्रमुख स्थानों पर पुल निर्माण के लिए शीघ्र योजना तैयार कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही छोटी-बड़ी नदियों और नालों पर भी जरूरत के अनुसार पुल-पुलियों का निर्माण कराया जाए, ताकि प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों का संपर्क पूरे वर्ष बना रहे।
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हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल समेत जय और शंख नदी पर पुल निर्माण की मांग तेज

ग्रामीणों ने डुमरिया प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में जर्जर हो चुकी ग्रामीण सड़कों की मरम्मत कराने और सड़क संपर्क से वंचित गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई ग्रामीण सड़कें लंबे समय से खराब स्थिति में हैं, जिससे आवागमन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बारिश के दिनों में सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। इसके अलावा ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के दौरान रैयती जमीन के उपयोग से जुड़े मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि पूर्व में सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई लोगों की निजी जमीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन प्रभावित रैयतों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे सभी मामलों की जांच कराकर प्रभावित जमीन मालिकों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर ग्रामीणों की जमीन का उपयोग करने के बाद उन्हें उनके अधिकार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। सड़क निर्माण और पुल-पुलियों की योजनाओं के साथ जमीन मुआवजे का मामला भी प्राथमिकता से सुलझाया जाना चाहिए।
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जर्जर ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और रैयती जमीन का मुआवजा देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान उस समय ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई, जब वे अपनी समस्याएं रखने के लिए प्रखंड मुख्यालय पहुंचे तो बीडीओ और सीओ अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। ग्रामीणों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब क्षेत्र की जनता अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचती है, तब जिम्मेदार अधिकारियों का कार्यालय में मौजूद नहीं रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रखंड मुख्यालय में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को अपने कामों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।
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बीडीओ-सीओ की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों में नाराजगी, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा प्रभावित रैयतों को मुआवजा देने की दिशा में जल्द ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने और अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आने पर बीडीओ एवं सीओ कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों का अधिकार हैं। वर्षों से इन सुविधाओं के अभाव में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कार्यों में कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। अब ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की।























