Share

Potka : चैती छठ का समापन, उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने किया पारण

  • चार दिनों की कठिन साधना के साथ घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : पोटका क्षेत्र में सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हो गया। हाता, हल्दीपोखर सहित आसपास के कई इलाकों में व्रतियों ने चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन करते हुए भगवान भास्कर और छठी मैया की पूजा-अर्चना की। व्रत के अंतिम दिन प्रातःकाल बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर एकत्रित हुए और उगते सूर्य को अर्घ अर्पित कर व्रत का पारण किया। इस दौरान घाटों पर भक्ति गीत, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।

इसे भी पढ़ें : Potka : पोटका में छठ पूजा : अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, भक्तों में उमड़ा उत्साह

अटूट विश्वास के साथ हर वर्ष बढ़ रही व्रतियों की संख्या

स्थानीय लोगों के अनुसार छठी मैया की पूजा सच्चे मन से करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, यही विश्वास इस पर्व को और विशेष बनाता है। इस वर्ष भी महिलाओं और पुरुषों ने समान रूप से व्रत रखकर अपनी आस्था का परिचय दिया। घाटों की साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा भी विशेष व्यवस्था की गई थी। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों ने मिलकर इस पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि देखी गई, जो इस पर्व के प्रति बढ़ती आस्था को दर्शाती है।

Jadugoda : यूसिलकर्मी सुधीर बारीक का निधन, जादूगोड़ा में शोक की लहर

एक वर्ष से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे सुधीर बारीक परिवार को छोड़ गए गहरे दुख में, सहकर्मियों ने

  • एक वर्ष से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे सुधीर बारीक
  • परिवार को छोड़ गए गहरे दुख में, सहकर्मियों ने दी श्रद्धांजलि
  • जादूगोड़ा मुक्तिधाम में आज दी गई अंतिम विदाई

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जादूगोड़ा : यूसिल कॉलोनी निवासी एवं यूसिलकर्मी सुधीर बारीक (56) का रविवार अहले सुबह अपने आवास पर निधन हो गया। वे पिछले एक वर्ष से कैंसर, हार्ट वाल्व और आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। बीते छह माह से वे अचेत अवस्था में घर के बेड पर थे। हालत बिगड़ने पर दो दिन पूर्व उन्हें ब्रह्मानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। बाद में उन्हें यूसिल अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। उनके निधन से यूसिल कर्मियों और जादूगोड़ा क्षेत्र में शोक की लहर है।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : टाटा टीएमएच डिस्पेंसरी सोनारी में CPR प्रशिक्षण, आपात स्थिति में जीवन बचाने की दी गई जानकारी

यूसिल क्षेत्र में शोक, आज होगा अंतिम संस्कार

स्वर्गीय एन.के. बारीक के पुत्र सुधीर बारीक अपने पीछे पत्नी, मां, पुत्र आयुष बारीक और पुत्री प्रिया बारीक समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही यूसिल कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों का तांता लग गया। सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार रविवार को जादूगोड़ा मुक्तिधाम में किया जाएगा। यूसिल कर्मियों ने उनके निधन को संस्थान और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

Jamshedpur : टाटा टीएमएच डिस्पेंसरी सोनारी में CPR प्रशिक्षण, आपात स्थिति में जीवन बचाने की दी गई जानकारी

हार्ट अटैक व पल्स रुकने की स्थिति में तुरंत CPR करने का दिया गया डेमोंस्ट्रेशन जेबी लाइव, रिपोर्टर जमशेदपुर :

  • हार्ट अटैक व पल्स रुकने की स्थिति में तुरंत CPR करने का दिया गया डेमोंस्ट्रेशन

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : सोनारी स्थित टाटा टीएमएच डिस्पेंसरी में आपातकालीन चिकित्सा स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों एवं उपस्थित लोगों को बताया गया कि यदि किसी मरीज को हार्ट अटैक या स्ट्रोक आता है और उसकी धड़कन रुक जाती है तथा पल्स नहीं चलती है, तो ऐसी स्थिति में तुरंत CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने CPR की सही तकनीक का डेमोंस्ट्रेशन कर सभी को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

इसे भी पढ़ें : New Labor Codes : भारत में चार नए लेबर कोड लागू, श्रम कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव

आपातकाल में सही तकनीक से बचाई जा सकती है जान

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि CPR देने में समय की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी है। विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को छाती पर दबाव देने की सही विधि, सांस देने की प्रक्रिया और मरीज को स्थिर रखने के तरीके विस्तार से समझाए। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्राथमिक उपचार की जानकारी हर व्यक्ति को होनी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाई जा सके। इस डेमोंस्ट्रेशन को सभी प्रतिभागियों ने ध्यानपूर्वक देखा और अभ्यास भी किया।

New Labor Codes : भारत में चार नए लेबर कोड लागू, श्रम कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव

29 पुराने श्रम कानून समाप्त, वेतन, सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों में बड़े सुधार जेबी लाइव, रिपोर्टर नई दिल्ली :

  • 29 पुराने श्रम कानून समाप्त, वेतन, सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों में बड़े सुधार

जेबी लाइव, रिपोर्टर

नई दिल्ली : भारत सरकार ने देश में श्रम सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार नए लेबर कोड्स को पूरी तरह लागू कर दिया है। इसके साथ ही पहले से लागू 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने इसका आधिकारिक ऐलान गजट अधिसूचना के माध्यम से किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य मजदूरों और कंपनियों दोनों के लिए कानूनों को सरल, पारदर्शी और एक समान बनाना है, ताकि अनुपालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के बाद लगभग 5 वर्षों में यह सुधार लागू हुआ है। शुरुआत 21 नवंबर 2025 को हुई थी, लेकिन नियमावली पूरी नहीं होने के कारण पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाए थे। अब सभी आवश्यक नियम तय कर दिए गए हैं और देशभर में एक साथ लागू कर दिए गए हैं।

इसे भी पढ़ें : National Lok Adalat : जमशेदपुर कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 3.18 लाख से अधिक मामलों का निष्पादन

श्रम कानूनों में समान वेतन, महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच पर जोर

नए लेबर कोड के तहत सबसे बड़ा बदलाव समान कार्य के लिए समान वेतन को लेकर किया गया है। अब एक ही तरह का काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों को बराबर वेतन मिलेगा, जिससे भेदभाव की संभावना खत्म होगी। इसके अलावा महिलाओं को मातृत्व के बाद 26 सप्ताह की छुट्टी का प्रावधान किया गया है, ताकि वे अपने और नवजात शिशु की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें। आवश्यकता पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी दी जा सकेगी। साथ ही 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए हर साल एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है, जिससे बीमारियों का समय पर पता लगाया जा सके।

इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, कुणाल महतो ने विद्यालयों को कंप्यूटर किए भेंट

कर्मचारियों के कौशल विकास और रोजगार सुरक्षा पर विशेष ध्यान

नए नियमों में सरकार ने नेशनल री-स्किलिंग फंड की भी व्यवस्था की है, जिसके तहत नौकरी जाने पर कर्मचारियों को नई तकनीकी ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य बनाया जाएगा। इससे बेरोजगारी की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही वेतन संरचना और पीएफ नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे टेक-होम सैलरी और कटौतियों के ढांचे में बदलाव देखने को मिलेगा। कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने के लिए समय दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये बदलाव न केवल श्रमिकों के हित में हैं, बल्कि उद्योग और निवेश माहौल को भी बेहतर बनाएंगे।

इसे भी पढ़ें : Meghahatuburu : मेघाहातुबुरु में ठेका मजदूर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, इलाके में शोक

सरलीकरण से बढ़ेगा निवेश और रोजगार के नए अवसर

सरकार का मानना है कि पहले 29 अलग-अलग श्रम कानूनों के कारण नियम जटिल और कठिन थे, जिससे कंपनियों को अनुपालन में दिक्कत होती थी। नए लेबर कोड इन सभी नियमों को सरल और एकीकृत करते हैं, जिससे व्यापार करना आसान होगा। इससे देश में निवेश बढ़ने की संभावना है और नई कंपनियों के आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार भारत के श्रम बाजार को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

इसे भी पढ़ें : Gua : रांजाबुरु माइंस बंद कर 18 गांव के मुंडा-मानकी का प्रदर्शन, स्थानीय रोजगार की उठी मांग

कौन से बड़े नियम बदलेंगे?

  1. नए लेबर कोड महिलाओं और काम करने वाले लोगों के फायदे के लिए लाया गया है। अब अगर पुरुष और महिला एक जैसा काम करते हैं, तो दोनों को एक ही जितनी सैलरी मिलेगी। इससे किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
  2. महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद अब 26 हफ्ते की छुट्टी मिलेगी, जिससे वो आराम से अपनी और बच्चे की देखभाल कर सकें। साथ ही जरूरत पड़ने पर महिलाएं घर से काम भी कर सकेंगी।
  3. इसके अलावा, नए लेबर कोड के अनुसार 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के सभी कर्मचारियों की हर साल एक बार मुफ्त मेडिकल जांच होगी, जिससे बीमारी का पता समय रहते चल सके।
  4. सरकार ने नेशनल री स्किलिंग फंड फंड बनाया है, जिससे लोग नई तकनीक सीख सकें। अगर किसी की नौकरी चली जाती है, तो ये फंड उसे नई ट्रेनिंग दिलाएगा, जिससे वो फिर से काम पा सके।
  5. नए लेबर कानून आने से सैलरी और पीएफ के नियम बदलेंगे। यानी अब सैलरी में डिडक्शन और हाथ में मिलने वाला पैसा थोड़ा अलग हो सकता है। कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने के लिए समय दिया है। आगे चलकर ये नियम हर तरह के कर्मचारियों चाहे वो दफ्तर में काम करते हों या बाहर सभी के लिए एक समान बनेंगे।

National Lok Adalat : जमशेदपुर कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 3.18 लाख से अधिक मामलों का निष्पादन

लोक अदालत के माध्यम से 8.16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राजस्व प्राप्ति जेबी लाइव, रिपोर्टर जमशेदपुर : जमशेदपुर जिला व्यवहार

  • लोक अदालत के माध्यम से 8.16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राजस्व प्राप्ति

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : जमशेदपुर जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस नेशनल लोक अदालत में कुल 3,18,765 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें 3,08,616 प्रीलिटिगेशन केस और 10,149 लंबित न्यायालयीन मामले शामिल रहे। लोक अदालत के माध्यम से कुल 8,16,24,299 रुपये की रिकॉर्ड राजस्व प्राप्ति भी हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन रांची से झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं झारखंड उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। इस अवसर पर पूर्वी सिंहभूम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अरविंद कुमार पांडेय उपस्थित रहे।

इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, कुणाल महतो ने विद्यालयों को कंप्यूटर किए भेंट

लोक अदालत को बताया न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी

 

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय ने कहा कि लोक अदालत आज आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय दिलाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि आपसी मेल-मिलाप और समझौते के जरिए लोगों को न्याय मिल रहा है, जिससे न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम हो रहा है। उन्होंने लोक अदालत को भारतीय न्याय प्रणाली की प्राचीन परंपरा से जुड़ी व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कुमार सौरव त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में कोर्ट स्टाफ, डालसा कर्मियों एवं पीएलवी (अधिकार मित्र) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मामलों के निष्पादन के लिए जिला व्यवहार न्यायालय में कुल 13 बेंच का गठन किया गया था।

Baharagoda : बहरागोड़ा में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, कुणाल महतो ने विद्यालयों को कंप्यूटर किए भेंट

सरस्वती शिशु मंदिरों में आधुनिक तकनीक से विद्यार्थियों को जोड़ने की पहल जेबी लाइव, रिपोर्टर बहरागोड़ा : बहरागोड़ा में शिक्षा

  • सरस्वती शिशु मंदिरों में आधुनिक तकनीक से विद्यार्थियों को जोड़ने की पहल

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सांसद पुत्र सह सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल महतो ने शनिवार को सराहनीय पहल की। उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, गीता आश्रम बहरागोड़ा एवं सरस्वती शिशु मंदिर रांगुनिया को निजी स्तर पर एक-एक कंप्यूटर भेंट किया। इस दौरान विद्यालय परिवार ने उनका पट्टा पहनाकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुणाल महतो ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जोड़ना बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी तकनीकी शिक्षा में पीछे न रहें। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।

इसे भी पढ़ें : Meghahatuburu : मेघाहातुबुरु में ठेका मजदूर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, इलाके में शोक

विद्यालयों में कंप्यूटर बढ़ाने का दिया आश्वासन

कुणाल महतो ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए तकनीकी शिक्षा अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आने वाले समय में विद्यालयों में कंप्यूटर की संख्या और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। उनके इस पहल की शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने खुलकर सराहना की। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य जगन्नाथ कुईला, विजय भांडारी, समाजसेवी चित्त देहुरी, बाबला बारीक, युवा नेता चंदन सीट एवं अमल बेरा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह प्रयास ग्रामीण शिक्षा को सशक्त बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Meghahatuburu : मेघाहातुबुरु में ठेका मजदूर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, इलाके में शोक

जेबी लाइव, रिपोर्टर मेघाहातुबुरु : मेघाहातुबुरु निवासी ठेका मजदूर बालाजी शर्मा उर्फ बाला (लगभग 38 वर्ष) ने शुक्रवार रात कथित

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मेघाहातुबुरु : मेघाहातुबुरु निवासी ठेका मजदूर बालाजी शर्मा उर्फ बाला (लगभग 38 वर्ष) ने शुक्रवार रात कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार, बाला मेघाहातुबुरु स्थित सेल आवास संख्या 12/5 ए टाइप में रहता था। शुक्रवार रात करीब 9 बजे उसने अपने कमरे के अंदर पंखे से बेडशीट के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसे नीचे उतारकर तत्काल किरीबुरू अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इसे भी पढ़ें Gua : रांजाबुरु माइंस बंद कर 18 गांव के मुंडा-मानकी का प्रदर्शन, स्थानीय रोजगार की उठी मांग

परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, बाला पिछले दो दिनों से काफी तनाव में था। बताया जा रहा है कि वह घर से बाहर भी नहीं निकल रहा था और ठीक से खाना भी नहीं खा रहा था। घटना के समय घर में उसकी मां और बहन मौजूद थीं। इसी दौरान उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और फंदे से झूल गया। कुछ देर बाद उसकी मां की नजर खिड़की से कमरे के अंदर गई तो बेटे को फंदे से लटका देख वह चीख पड़ी। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर बाला को नीचे उतारा। इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

इसे भी पढ़ें Jamshedpur : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम ने मॉक ड्रिल कर दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाला मिलनसार और सामाजिक स्वभाव का युवक था। वह हर सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ा रहता था और इलाके में काफी लोकप्रिय था। उसकी अचानक मौत की खबर से लोग स्तब्ध हैं। बताया जा रहा है कि बाला अपने परिवार में इकलौता भाई था और उसकी तीन बहनें हैं। पिता का पहले ही निधन हो चुका है। बेटे की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। घटना की सूचना मिलने के बाद किरीबुरू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।

You cannot copy content of this page

Scroll to Top