- गर्मी की शुरुआत के साथ जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ीं, वन विभाग की चिंता बढ़ी
- जंगल की आग से वन्यजीवों और पर्यावरण को हो रहा भारी नुकसान
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चाईबासा : चाईबासा क्षेत्र में गर्मी की शुरुआत होते ही एक बार फिर जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। गुवा से बड़ाजामदा जाने वाले रास्ते के किनारे स्थित जंगलों में असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगाए जाने की खबरें मिल रही हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले को लेकर भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं अनुसूचित जनजाति मोर्चा, चाईबासा के हरिचरण सांडिल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सारंडा जैसे घने और महत्वपूर्ण वन क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग की ओर से लगातार ग्रामीणों को जंगलों में आग नहीं लगाने के लिए जागरूक किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग महुआ चुनने में आसानी के लिए सूखे पत्तों में आग लगा देते हैं, जिससे आग तेजी से फैल जाती है और पूरे जंगल को नुकसान पहुंचाती है।
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महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में लगाई जा रही आग
वन विभाग के कर्मियों के अनुसार जंगलों में आग लगने से केवल पेड़-पौधों को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि कई दुर्लभ जीव-जंतु भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचती है। विभाग का कहना है कि जैसे ही जंगल में आग लगने की सूचना मिलती है, वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के काम में जुट जाती है। साथ ही वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जंगलों को आग से बचाने में सहयोग करें और अगर कहीं आग लगती दिखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना विभाग को दें। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा में ग्रामीणों की भागीदारी बेहद जरूरी है, तभी इस तरह की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।























