जेबी लाइव, रिपोर्टर
झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर छा गई है। 62 वर्षीय सोरेन का इलाज के दौरान दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राज्य के लोग मर्माहत हैं। शनिवार को उनके पैतृक गांव घोड़ाबंधा के निकट धूमा कॉलोनी में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भी उनके अंतिम संस्कार में भाग लिया और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि रामदास सोरेन का असमय निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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जमीनी स्तर से शीर्ष तक का सफर
देवेंद्र नाथ महतो ने सोरेन के राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक ग्राम प्रधान से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। यह उनकी लोकप्रियता और जमीनी नेता होने का प्रमाण है। उनका अंतिम दर्शन करने के लिए उनके आवास पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। सोरेन पिछले 14 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। 2 अगस्त को उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था, जिसके बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली के अपोलो अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेन डेड होने के बाद उनके सभी अंग काम करना बंद कर दिए थे, जिसके बाद शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। इतने दिनों तक उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।
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सदैव दिलों में रहेंगे रामदास सोरेन
झामुमो नेता पलटन मुर्मू ने भी रामदास सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनके निधन से पूरा झारखंड, खासकर घाटशिला के लोगों को गहरा आघात पहुंचा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। मुर्मू ने सोरेन को एक सरल, मिलनसार और ईमानदार व्यक्ति बताया। उन्होंने झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को भी याद किया और कहा कि उनके दिखाए गए रास्ते पर चलकर ही संगठन को और मजबूत किया जाएगा। मुर्मू ने कहा कि भले ही रामदास सोरेन आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा हमारे दिलों में बसे रहेंगे।
























