लूट और हथियारबंद वारदातों के बाद बढ़ी चिंता, अपराध से पहले खुफिया तंत्र की सक्रियता को लेकर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
अपराध रोकने के लिए मजबूत सूचना तंत्र और रात्रि गश्ती जरूरी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत चौका थाना क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से सामने आ रही लूट और हथियारबंद आपराधिक घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अपराध की घटनाओं के बाद पुलिस की सक्रियता तो दिखाई देती है, लेकिन वारदात से पहले अपराधियों की गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच रही, यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी जिले को अपराधमुक्त बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं, बावजूद इसके क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं ने पुलिस की खुफिया व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। करीब 20 अगस्त से बांसा स्थित शराब दुकान में लूट के प्रयास, उरमाल पेट्रोल पंप से करीब 25 हजार रुपये की लूट और राशन दुकान में वारदात के बाद गुरुवार रात तुलग्राम स्थित माउंट रेस्टोरेंट में चार हथियारबंद बदमाशों ने संचालक प्रकाश महतो से करीब छह हजार रुपये नकद और मोबाइल लूट लिया।
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चौका में लगातार आपराधिक घटनाओं से बढ़ी पुलिस की चुनौती
माउंट रेस्टोरेंट की घटना की सूचना मिलते ही चौका थाना प्रभारी गौरव कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आसपास के थानों को अलर्ट करते हुए वाहन जांच अभियान चलाया और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। हालांकि, लगातार हो रही वारदातों के बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधियों की गतिविधियों पर यदि पहले से नजर रखी जाती और सूचना तंत्र मजबूत होता तो कई घटनाओं को टाला जा सकता था। क्षेत्र में अवैध शराब, स्क्रैप, अवैध बालू सहित अन्य संदिग्ध कारोबार को लेकर भी चर्चाएं हैं। लोगों ने होटल, ढाबों और ऐसे संभावित ठिकानों की नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है, जहां देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां होने की आशंका रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय काले शीशे वाले स्कॉर्पियो, थार सहित अन्य लग्जरी वाहनों की तेज आवाजाही भी देखी जाती है, जिस पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।
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होटल-ढाबों और संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी बढ़ाने की मांग
लगातार घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि चौका पुलिस अपराध होने के बाद ही सक्रिय क्यों होती है और अपराध से पहले उसका सूचना तंत्र क्यों नहीं जागता? स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की गश्ती और वाहन जांच के साथ-साथ क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध लोगों, अवैध कारोबार और अपराधियों के संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए। लोगों का मानना है कि केवल घटना के बाद छापेमारी और जांच से अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल है। इसके लिए थाना स्तर पर मजबूत सूचना तंत्र, नियमित रात्रि गश्ती और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है। अब पुलिस के सामने चुनौती केवल हाल की घटनाओं का खुलासा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी वारदातों को रोकने के लिए अपने खुफिया और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने की भी है।


























