- जैक 8वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में ‘डी ग्रेड’ को लेकर फूटा आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
- मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
- सामाजिक आंदोलनों के जरिए हक की लड़ाई तेज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर के सर्किट हाउस में आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और ओल चिकी हूल बैसी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित प्रेसवार्ता में संथाली भाषा के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई गई। संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सत्र 2025-26 में जैक बोर्ड द्वारा आयोजित 8वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम में संथाली भाषा के विद्यार्थियों को जानबूझकर ‘डी ग्रेड’ दिया गया है, जबकि अन्य विषयों में उनके अंक संतोषजनक हैं। इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा गया कि इससे आदिवासी समाज के छात्रों का अपनी भाषा से मोहभंग करने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे ने संथाल समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है और अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल है।
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शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर उठते सवाल
प्रेसवार्ता में यह भी कहा गया कि छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं की भौतिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक परिणाम सामने आ सके। संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में किसी भी अधिकारी की लापरवाही या साजिश सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में संथाली भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन द्वारा जनजातीय शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया, जिससे छात्रों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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ओल चिकी लिपि में पढ़ाई और शिक्षक बहाली की उठी मांग
संगठनों ने मांग की कि संथाली भाषा की पढ़ाई ओल चिकी लिपि में शुरू की जाए और इसके लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पाठन-पाठन सामग्री की भी भारी कमी है, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, संथाली एकेडमी काउंसिल के गठन की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने की मांग की गई। प्रेसवार्ता में यह भी बताया गया कि पहले एक अधिकारी दल को पश्चिम बंगाल भेजा गया था, जहां से रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर बढ़ती चिंता
प्रेसवार्ता में झारखंड टेट परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए। संगठनों का कहना है कि संथाली भाषा की आधिकारिक लिपि ओल चिकी है, फिर भी परीक्षा में इसे देवनागरी लिपि में लिखने का निर्देश देना गलत है। इसके साथ ही मगही और भोजपुरी भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई गई। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं को शामिल करने के कारण परीक्षा को स्थगित करना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। पिछले 10 वर्षों से टेट परीक्षा नहीं होने के कारण शिक्षक बहाली भी प्रभावित हुई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है।
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भर्ती प्रक्रिया में देरी से युवाओं में बढ़ी निराशा
प्रेसवार्ता के अंत में संगठनों ने सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आदिवासी समाज चरणबद्ध आंदोलन करेगा, जो आगे चलकर उग्र रूप ले सकता है। इस दौरान ओल चिकी हूल बैसी के महासचिव दुर्गा चरन मुर्मू, माझी बाबा बिंदु सोरेन, नवीन मुर्मू, दुलाल हांसदा, हरिहर टुडू, बाबूराम सोरेन और बुद्धेश्वर किस्कू सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई भाषा, पहचान और अधिकारों की है, जिसे किसी भी कीमत पर जारी रखा जाएगा।























