72 घंटे तक चला बंद और चक्का जाम आंदोलन, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर बनी सहमति
प्रशासन, सेल प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच हुई निर्णायक बैठक
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के फैसले से ग्रामीणों में खुशी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : गुवा सेल माइंस क्षेत्र में पिछले 72 घंटे से जारी बंद और चक्का जाम आंदोलन आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पहल और नेतृत्व में समाप्त हो गया। स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं द्वारा 500 युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर यह आंदोलन लगातार तीन दिनों तक चला, जिससे खदान क्षेत्र में उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। आंदोलनकारियों का कहना था कि खदान क्षेत्र से करोड़ों रुपये का खनिज निकाला जाता है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं मिल रही है। इसी मांग को लेकर 19 गांवों के ग्रामीण, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हुए और रोजगार की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन करते रहे।
इसे भी पढ़ें : Gua : गुवा सेल क्लब में कराटे खिलाड़ियों का भव्य सम्मान समारोह आयोजित
कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद देर रात बनी सहमति
आंदोलन के दौरान कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन शुरुआती बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद बुधवार शाम मधु कोड़ा की अध्यक्षता में प्रशासन, सेल प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच निर्णायक बैठक आयोजित की गई, जो देर रात तक चली। लंबी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद सभी पक्षों के बीच सहमति बनी और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। समझौते के तहत खदान प्रभावित 18 गांवों समेत कुल 19 गांवों के बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। साथ ही रांजाबुरू खदान में कार्यरत “मां सरला” ठेका कंपनी द्वारा तत्काल 50 स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर सहमति बनी। बैठक में यह भी तय किया गया कि भविष्य में होने वाली नई बहाली में भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसे भी पढ़ें : Potka : संजीव सरदार ने उठाई मांग, पोटका के शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी स्थानीय स्तर पर लगाने की अपील
ग्राम सभा के माध्यम से तैयार होगी बेरोजगार युवाओं की सूची
समझौते के अनुसार ग्राम सभा के माध्यम से शिक्षित एवं कार्यकुशल बेरोजगार युवाओं की सूची तैयार की जाएगी। सूची की जांच के बाद आवश्यकता अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बाहरी लोगों की बजाय स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले। आंदोलन समाप्त होने के बाद खदान क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने लगी है और उत्पादन व परिवहन कार्य धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने इसे अपने संघर्ष की बड़ी जीत बताते हुए मधु कोड़ा की भूमिका की सराहना की। लोगों ने उम्मीद जताई कि समझौते के तहत लिए गए निर्णयों को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।




























