कुकड़ू प्रखंड के आदरडीह चौका गांव में देर रात हाथी ने मचाया उत्पात, परिवार ने भागकर बचाई जान
ग्राम प्रधान की पत्नी घायल, घर में रखा राशन और महत्वपूर्ण कागजात नष्ट
हाथी प्रभावित गांवों को रेड जोन घोषित करने की मांग तेज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
सरायकेला : कुकड़ू प्रखंड के ईचाडीह पंचायत अंतर्गत आदरडीह चौका गांव में बुधवार देर रात जंगली हाथी के आतंक से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। जानकारी के अनुसार रात करीब 10:30 बजे एक जंगली हाथी गांव में घुस आया और ग्राम प्रधान गुरुपद गोप के घर पर हमला कर दिया। हाथी ने घर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय परिवार के सभी सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। किसी तरह ग्रामीणों और परिजनों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि चांडिल बांध विस्थापित क्षेत्र में लगातार हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
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हाथी के हमले में अनाज और जरूरी सामान हुआ बर्बाद
हमले के दौरान हाथी ने घर में रखा अनाज और अन्य सामान भी तहस-नहस कर दिया। डेगची और बोरों में रखा चावल बिखेर दिया गया, जबकि कई घरेलू सामान और बक्से में रखे जरूरी कागजात भी नष्ट हो गए। इस घटना में ग्राम प्रधान की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। बताया जा रहा है कि उनके सीने में अंदरूनी चोट आई है और पैर से लगातार खून बह रहा था। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों में घुसने से लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। रात होते ही लोग डर के कारण जागकर पहरा देने को मजबूर हो रहे हैं।
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वन विभाग पर लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा और मुआवजे की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एलिफेंट ड्राइव टीम और क्यूआरटी दस्ता होने के बावजूद विभाग हाथियों को गांव में घुसने से रोकने में असफल साबित हो रहा है। सूचना देने के बाद भी टीम समय पर नहीं पहुंचती, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विस्थापित अधिकार मंच ने पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने, घायल महिला का मुफ्त इलाज कराने और गांव में स्थायी हाथी भगाओ दस्ता तैनात करने की मांग की है। साथ ही कुकड़ू, ईचागढ़ और चांडिल क्षेत्र के हाथी प्रभावित गांवों को रेड जोन घोषित कर माइकिंग और होर्डिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की मांग भी तेज हो गई है।




























