- भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता जय प्रकाश पांडेय ने कहा— कांग्रेस को राम नाम से नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी सोच से आपत्ति है
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की योजना
- महिला और युवा सशक्तिकरण पर केंद्र सरकार का फोकस
- 2047 तक विकसित भारत का संकल्प
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता सह झारखंड राज्य सामाजिक कल्याण आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर ‘जी राम जी ग्रामीण योजना’ किए जाने पर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की सोच पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों से बिल्कुल अलग है। जहां कांग्रेस सरकारों की नीति भारतीय संस्कृति और आस्था से दूरी बनाने की रही है, वहीं मोदी सरकार की सोच भगवान श्रीराम की संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ‘जी राम जी ग्रामीण योजना’ केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत वैचारिक और व्यावहारिक कदम है।
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जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका, स्थानीय रोजगार और मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। योजना के तहत कृषि आधारित उद्योग, कुटीर व लघु उद्योग, महिला स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी। किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी आय में वास्तविक वृद्धि होगी।
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उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से नए अवसर खोले जाएंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। पांडेय ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब तक कांग्रेस और एनडीए सरकारों द्वारा ग्रामीण रोजगार पर लगभग 11.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने लगभग 7.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस केवल विरोध की राजनीति कर रही है।
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जय प्रकाश पांडेय ने कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति के विरोध का आरोप लगाते हुए 2007 का उल्लेख किया, जब सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक हलफनामे में रामलला को काल्पनिक बताया गया था। उन्होंने कहा कि यह भारतीय आस्था का गंभीर अपमान था। महात्मा गांधी स्वयं रामराज्य की कल्पना करते थे और उनके अंतिम शब्द भी “राम” थे। ऐसे में राम नाम से कांग्रेस को आपत्ति क्यों है, यह जनता भली-भांति समझ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अब विरोध छोड़कर राष्ट्रहित में एनडीए सरकार का समर्थन करना चाहिए, ताकि 2047 तक भारत को आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से विकसित राष्ट्र बनाया जा सके।
























