डीलरों ने समय पर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने का लगाया आरोप, विभाग से स्थायी समाधान की मांग
समय पर खाद्यान्न नहीं मिलने से प्रभावित हो रहा वितरण
डीएसडी और गोदाम प्रबंधन पर लगाए आरोप
समयबद्ध व्यवस्था की मांग, सुधार नहीं हुआ तो बढ़ेगी समस्या
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका प्रखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को लेकर डीलरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। डीलरों का आरोप है कि प्रत्येक माह समय पर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने के कारण लाभुकों तक राशन पहुंचाने में गंभीर परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि महीने का अधिकांश समय बीत जाने के बाद अंतिम दिनों में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर वितरण कार्य पूरा करना मुश्किल हो जाता है। डीलरों के अनुसार 21 सितंबर तक पूरे प्रखंड में खाद्यान्न वितरण का प्रतिशत महज 20 से 22 प्रतिशत के बीच रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
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खाद्यान्न उठाव में देरी से बढ़ी डीलरों की परेशानी
डीलरों का कहना है कि खाद्यान्न वितरण में देरी का मुख्य कारण समय पर उठाव नहीं मिलना है। उनका आरोप है कि डीएसडी तथा गोदाम में कार्यरत लेबर की कथित लापरवाही और मनमाने रवैये के कारण खाद्यान्न उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है। डीलर संघ के अध्यक्ष अनवर अली सहित कई डीलरों ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को पूरी स्थिति की जानकारी होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। गोदाम से खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है।
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लाभुकों तक राशन पहुंचाने की चुनौती बनी व्यवस्था
डीलरों ने विभाग से मांग की है कि खाद्यान्न आवंटन, उठाव और वितरण की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि लाभुकों को समय पर राशन उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन खाद्यान्न ही समय पर नहीं मिलने से वे असहाय महसूस कर रहे हैं। डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो आने वाले दिनों में पोटका की पूरी पीडीएस व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे लगातार विभाग को स्थिति से अवगत करा रहे हैं और यदि इसके बावजूद सुधार नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी डीलरों पर नहीं डाली जानी चाहिए।