पूर्व मुख्यमंत्री ने गुमला के चैनपुर पहुंचकर दिवंगत आदिवासी नेत्री को दी श्रद्धांजलि
पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग
आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने की अपील
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुमला : झारखंड की आदिवासी नेत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय निशा कुमारी भगत की आत्महत्या को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस घटना को हेमंत सोरेन सरकार के माथे पर कलंक बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच कराने की मांग की है। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड पहुंचे और दिवंगत निशा भगत के अंतिम यात्रा (मिट्टी कार्यक्रम) में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए रघुवर दास ने कहा कि निशा भगत की असमय मृत्यु अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और झकझोर देने वाली घटना है। यह केवल एक महिला की मृत्यु का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और आदिवासी समाज के अधिकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला को यदि अपनी जमीन, संस्कृति और समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए इस तरह असहाय महसूस करना पड़े, तो यह पूरे शासन-प्रशासन के लिए चिंताजनक स्थिति है।
इसे भी पढ़ें : Seraikela : सरायकेला-खरसावां के तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विकास, उपायुक्त ने किया निरीक्षण
निशा भगत की मौत के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सरकार को घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि निशा भगत ने अपने अंतिम वीडियो में राज्य सरकार, पुलिस-प्रशासन और कथित जमीन माफियाओं पर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आदिवासी समाज की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतों को लेकर प्रशासन गंभीर क्यों नहीं है? जमीन माफियाओं के खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? निशा भगत द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रघुवर दास ने कहा कि निशा भगत सरना-सनातन संस्कृति, आदिवासी अस्मिता, पारंपरिक रीति-रिवाज और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही थीं। उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आवाज को दबाने और उसके अधिकारों की लड़ाई को कुचलने के आरोप बेहद गंभीर हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के आरक्षण, धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर भी संवैधानिक प्रावधानों एवं ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता जताई।
इसे भी पढ़ें : Seraikela : दीपावली की रौनक से जगमगाया सरायकेला, दीयों और पटाखों के बाजार में उमड़ी भीड़
अंतिम वीडियो में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग, जमीन माफियाओं पर उठाए सवाल
रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि निशा भगत की आत्महत्या से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और समयबद्ध सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि निशा भगत ने अपने अंतिम वीडियो में जिन लोगों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, उनकी भी गहन जांच होनी चाहिए। जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं जमीन घोटाले के मामले में आरोपों का सामना कर चुके हैं, इसलिए इस प्रकरण में जनता और पीड़ित परिवार को राज्य सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। रघुवर दास ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार जल्द से जल्द सीबीआई जांच की अनुशंसा करेगी, ताकि निशा भगत की मौत से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा हो सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
इसे भी पढ़ें : Gua : नुईया गांव में जहरीले सांप ने महिला को डसा, सेल अस्पताल में भर्ती
निशा भगत मामले में सीबीआई जांच की मांग, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की अपील
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार के सामने पीड़ित परिवार के लिए पांच प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि दिवंगत निशा भगत के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जे और जमीन माफियाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। आदिवासी महिलाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। साथ ही निशा भगत द्वारा अपने अंतिम वीडियो और अन्य माध्यमों से उठाए गए सभी मुद्दों पर सरकार सार्वजनिक रूप से जवाब दे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की महिलाओं को अपनी जमीन, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करते समय सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जमीन संबंधी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करे और पीड़ितों को न्याय दिलाए। उन्होंने इन मांगों को केवल एक परिवार की सहायता तक सीमित न बताते हुए आदिवासी समाज के व्यापक हितों से जुड़ा विषय बताया।
इसे भी पढ़ें : Gua : धनतेरस पर बिरसा नगर को मिला नया ट्रांसफार्मर, 200 परिवारों के घरों में लौटी रोशनी
पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग
रघुवर दास ने कहा कि निशा भगत का संघर्ष और उनके द्वारा उठाए गए सवाल व्यर्थ नहीं जाने चाहिए। उनकी मृत्यु से जुड़े प्रत्येक सवाल का जवाब सामने आना चाहिए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज से अपील की कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा, धार्मिक पहचान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के वास्तविक अधिकारों और हितों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निशा भगत को न्याय दिलाने की लड़ाई केवल उनके परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा सवाल है। सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। अंत में उन्होंने दिवंगत निशा भगत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए और उनके संघर्ष को याद रखा जाएगा।























