खुर्शी से तिलाई घुटू मार्ग पर कीचड़ और जाम से लोगों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाया अनदेखी का आरोप
कुल्डीहा-चतरो मार्ग की हालत भी खराब, पाइपलाइन कार्य बना परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल सड़क व्यवस्था से बढ़ी मुश्किलें
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : हल्की बारिश ने ही जादूगोड़ा-पोटका क्षेत्र के दर्जनों गांवों की कच्ची सड़कों की पोल खोल दी है। नरवा पहाड़ से सटे डोमजूड़ी पंचायत अंतर्गत खुर्शी गांव से तिलाई घुटू तक जाने वाली सड़क पूरी तरह कीचड़मय हो चुकी है। रविवार अहले सुबह सड़क पर दो घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई मोटरसाइकिल चालक सड़क पर फंस गए और कई लोग गिरकर चोटिल भी हुए। तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट में ड्यूटी जा रहे यूसिलकर्मी बड़ा दशमी माझी की कार भी कीचड़ में बुरी तरह धंस गई, जिसे ग्रामीणों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि हल्की बारिश में ही सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
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बारिश के बाद गांवों की सड़कें बनी मुसीबत का कारण
खुर्शी गांव के ग्रामीण वीरेंद्र हासदा ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण एम्बुलेंस तक गांव में आने से कतराती है। बीमार मरीजों को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, तब जाकर इलाज संभव हो पाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में जनप्रतिनिधियों को वोट के जरिए जवाब दिया जाएगा। लगातार उपेक्षा से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
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सड़क समस्या को लेकर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
इधर जादूगोड़ा के कुल्डीहा से चतरो गांव तक की सड़क भी बारिश में कीचड़मय हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर घर नल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए संवेदक द्वारा सड़क के बीचों-बीच गड्ढे खोद दिए गए, जिससे हालात और खराब हो गए हैं। सड़क पर चलना जोखिम भरा हो गया है और लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने संवेदक और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जल्द मरम्मत कार्य कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़कें जानलेवा बन चुकी हैं और प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।























