रहन-सहन, खानपान और शिक्षा व्यवस्था की जांच कर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
शिक्षा और देखभाल व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी शनिवार सुबह निरीक्षण के लिए घाघीडीह स्थित संप्रेषण गृह पहुंचे। उनके साथ लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ अधिवक्ता विदेश सिंह, रंजना कुमारी तथा डालसा कार्यालय के सहायक रवि मुर्मू भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान पैरा लीगल वालंटियर अरुण कुमार, सीमा देवी, ग्लोरिया पूर्ति और रामकंडेय मिश्रा भी उपस्थित रहे। सचिव ने सबसे पहले बच्चों के आवासीय कमरों का निरीक्षण किया और वहां की साफ-सफाई, रहन-सहन तथा पोशाक की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने गृहपति से बच्चों की दिनचर्या और देखरेख को लेकर विस्तार से बातचीत की।
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बच्चों की सुविधाओं और साफ-सफाई पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान कुमार सौरभ त्रिपाठी ने बच्चों के खानपान और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी गहन जांच की। उन्होंने यह जानकारी ली कि बच्चों को समय पर दूध, फल, नॉनवेज और दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं या नहीं तथा डॉक्टर नियमित रूप से आते हैं अथवा नहीं। इसके बाद सचिव खाद्य सामग्री के गोदाम और रसोईघर पहुंचे, जहां बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की गई। उन्होंने खाना बनाने वाली महिलाओं से भी भोजन के स्तर को लेकर बातचीत की और कहा कि वह स्वयं भी बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को ग्रहण करेंगे, ताकि गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों के खानपान और देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर हुई जांच
इसके बाद डालसा सचिव बाल कल्याण समिति पहुंचे, जहां समिति के अध्यक्ष अवधेश प्रसाद यादव सहित सदस्य पवन कुमार, सीमा झा और रूबी साहू से बातचीत कर बच्चों की शिक्षा, खेलकूद और योग व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था और बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की। करीब एक घंटे तक चले इस निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि बच्चों की देखरेख में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि संप्रेषण गृह में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।






















