मुरी-सिल्ली के पतराहातु स्कूल मैदान में बा परब (सरहुल) मिलन समारोह, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अस्मिता पर जोर
पारंपरिक सरहुल नृत्य से झूम उठा पतराहातु मैदान
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मुरी : मुरी-सिल्ली क्षेत्र के पतराहातु स्कूल मैदान में विधानसभा स्तरीय बा परब (सरहुल) मिलन समारोह का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रेम शाही मुंडा ने आदिवासी समाज को अधिकार, पहचान और जागरूकता के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या गणना चल रही है और यदि आदिवासियों को सरना धर्म कोड नहीं मिलता है तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “आदिवासी हैं तो प्राकृतिक और पर्यावरण है”, इसलिए आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। समारोह में मौजूद लोगों ने पारंपरिक नृत्य, गीत और संस्कृति के माध्यम से अपनी एकता का प्रदर्शन किया।
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सरना धर्म कोड की मांग तेज, आदिवासी समाज ने दिखाई एकजुटता
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचीं ज्योसना केरकेट्टा ने आदिवासी समाज को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा बाहरी-भीतरी और मूलवासी सभी को अपनाया, लेकिन आज आदिवासी खुद अपने अधिकारों से वंचित नजर आ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से सवाल करना सीखने और सामाजिक चेतना को मजबूत करने का आग्रह किया। अन्य वक्ताओं ने कहा कि इतिहास से सीख लेने की जरूरत है और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग को शिक्षा से जोड़ने का सपना देखा था। संविधान के कारण ही आज समाज को शिक्षा और अधिकार प्राप्त हुए हैं।
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सरहुल महोत्सव में शिक्षा और अधिकारों पर जोर
मिलन समारोह से पहले सरना स्थल पर साल वृक्ष की पूजा-अर्चना पारंपरिक विधि-विधान से की गई। पाहन रामनाथ, पंचानन पाहन, लछमन पाहन और दिलीप पाहन ने लोटे से जल अर्पित कर साल वृक्ष और अग्नि की पूजा संपन्न कराई। इसके बाद सरहुल अखड़ा में आदिवासी ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। समारोह में शिला उरांव, लक्ष्मी मुंडा, विश्वनाथ मुंडा, करम मुंडा, अजय सिंह मुंडा, सिदाम सिंह मुंडा, सीताराम मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, आदित्य सिंह मुंडा, बोध मुंडा, अनिल मुंडा, द्रौपदी मुंडा और कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे आयोजन में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।
























