सीढ़ी की चौड़ाई, लोहे की रेलिंग और निर्माण में देरी को लेकर नेताओं ने जताई नाराजगी
उपायुक्त से होगी शिकायत, निर्माण कार्य की जांच की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका स्थित रंकणी मंदिर में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण कार्य कराया जा रहा है। परियोजना के तहत पार्क निर्माण, पहाड़ी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां, प्लेटफार्म और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। सोमवार को माँ रंकणी कापड़ गादी घाट विकास समिति के अध्यक्ष दिनेश सरदार तथा कांग्रेस जिला महासचिव सुबोध सरदार ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों नेताओं ने निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहाड़ी तक जाने वाली सीढ़ी मात्र चार फीट चौड़ी बनाई जा रही है, जबकि श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए इसकी चौड़ाई कम से कम छह फीट होनी चाहिए, ताकि लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो।
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रंकणी मंदिर विकास कार्य में श्रद्धालुओं की सुविधा पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान नेताओं ने सीढ़ियों एवं पार्क की चारदीवारी में लगाए जा रहे लोहे की रेलिंग और ग्रिल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि लोहे की जगह जीआई सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे निर्माण अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ हो सके। कांग्रेस नेता सुबोध सरदार ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है तथा गुणवत्ता को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की योजना में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो घपला-घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नेताओं ने ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य करने की सलाह देते हुए कार्य में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की।
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निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता की मांग तेज
दिनेश सरदार और सुबोध सरदार ने बताया कि नवंबर 2024 से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि परियोजना में लगातार देरी होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। नेताओं ने कहा कि मंगलवार को जिले की उपायुक्त से मुलाकात कर निर्माण कार्य में हो रही देरी, गुणवत्ता संबंधी शिकायत तथा लोहे की जगह जीआई सामग्री उपयोग करने की मांग की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से जल्द जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की, ताकि धार्मिक स्थल का विकास बेहतर गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा हो सके। स्थानीय लोगों ने भी मंदिर परिसर के विकास कार्य में पारदर्शिता और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग की मांग उठाई है।
























