रांची में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार पर महंगाई और भेदभाव के आरोप
जेबी लाइव, रिपोर्टर
रांची : रांची के हरमू स्थित JMM पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सुप्रीयो भट्टाचार्य ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2014 में महंगाई के खिलाफ दिए गए नारे अब “गद्दी छोड़ो मोदी सरकार” में बदल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और यात्रा किराए में दो से ढाई गुना तक वृद्धि हुई है। कमर्शियल गैस की कीमत 950 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये के पार पहुंच गई है, जिससे होटल और कैटरिंग व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।
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महंगाई और आर्थिक हालात पर जताई चिंता, रेलवे व्यवस्था पर उठाए सवाल
सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण आम लोगों के सामने भूखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने दावा किया कि स्ट्रीट फूड कारोबार प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों के हॉस्टल तक बंद होने की नौबत आ रही है। आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय भारत से आगे निकल गई है और भारतीय रुपया बांग्लादेशी टका के मुकाबले कमजोर हुआ है। रेलवे के मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अन्य राज्यों में रिजेक्ट होने वाली ट्रेनों को झारखंड भेज दिया जाता है, जबकि राज्य देश को सबसे अधिक राजस्व देता है। इसके बावजूद यहां रेल सुरक्षा और मेंटेनेंस की स्थिति खराब बनी हुई है।
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Sarna धर्म कोड की मांग तेज, आदिवासी पहचान बचाने पर जोर
प्रेस कांफ्रेंस में बाबूलाल मरांडी के बयान की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक पर उनकी बातें हास्यास्पद हैं। उन्होंने मांग की कि 33 प्रतिशत आरक्षण पंचायत और नगर निकाय सहित सभी निर्वाचित संस्थाओं में लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों को युद्ध की तरह लड़ रही है और केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्ष के खिलाफ किया जा रहा है। आदिवासी पहचान के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर 2027 की जनगणना में सरना धर्म कोड शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए जनगणना में अलग कॉलम जोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है।






















