दुनियाभर में मौसम पैटर्न में बदलाव, भारत पर पड़ सकता है गहरा असर
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : देशभर में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है और राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। मई महीने की शुरुआत भले ही कुछ स्थानों पर बारिश के साथ हुई हो, लेकिन तेज धूप और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अप्रैल माह में भी कई जगहों पर तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े। मौसम विभाग लगातार लू को लेकर चेतावनी जारी कर रहा है। यह स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में इसी तरह के चरम मौसम देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे “सुपर अल नीनो” नामक एक शक्तिशाली जलवायु घटना जिम्मेदार हो सकती है, जो इस वर्ष के अंत तक और अधिक प्रभावी रूप ले सकती है।
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वैश्विक एजेंसियों ने जताई मजबूत अल नीनो बनने की संभावना

अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों ने भी इस खतरे को लेकर चेतावनी दी है। राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार मई से जुलाई के बीच अल नीनो बनने की लगभग 60 प्रतिशत संभावना है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी और विश्व मौसम संगठन (WMO) ने भी संकेत दिए हैं कि इस बार अल नीनो काफी शक्तिशाली हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ इसे “सुपर अल नीनो” का रूप लेने की आशंका जता रहे हैं। यह स्थिति एशियाई देशों, खासकर भारत पर अधिक प्रभाव डाल सकती है, जहां मौसम की असामान्य परिस्थितियां कृषि, जल संसाधन और जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
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क्या होता है सुपर अल नीनो और क्यों है यह खतरनाक
सुपर अल नीनो दरअसल अल नीनो का अत्यंत शक्तिशाली रूप होता है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है। यह एक दुर्लभ जलवायु घटना है, जो कई दशकों में एक बार देखने को मिलती है। इसके दौरान व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या दिशा बदल लेती हैं, जिससे गर्म पानी का फैलाव बढ़ जाता है और वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है। इससे पहले 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में ऐसी घटनाएं दर्ज की गई थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2026 में भी इसी तरह की स्थिति बन सकती है, जिससे भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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भारत में संभावित असर, IMD ने जारी किया पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी इस वर्ष के लिए अपने पूर्वानुमान में गर्मी और लू के बढ़ते असर की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार मई में हिमालयी तराई क्षेत्रों, पूर्वी तटीय राज्यों, गुजरात और महाराष्ट्र में सामान्य से अधिक लू चल सकती है। हालांकि, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय पर आगमन की संभावना के चलते मई में औसत वर्षा सामान्य से अधिक रहने का अनुमान भी जताया गया है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह सामान्य या उससे कम भी रह सकता है। कुल मिलाकर, सुपर अल नीनो की आशंका ने भारत में मौसम को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर कृषि, जल संकट और आम जनजीवन पर पड़ सकता है।
























