- RTI से मिली जानकारी के बाद अधिवक्ताओं में गहरी नाराजगी, प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जिला अधिवक्ता संघ, सरायकेला में सिविल न्यायालय भवन के संभावित स्थानांतरण को लेकर अध्यक्ष प्रभात कुमार की अध्यक्षता में एक इमरजेंसी जनरल बॉडी बैठक आहूत की गई। बैठक में संघ के सह सचिव जलेश कवि द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त लिखित सूचना प्रस्तुत की गई, जिससे पता चला कि न्यायालय भवन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लंबित है। इस जानकारी के सामने आने पर बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता गोलक बिहारी पति, के.पी. दुबे, आशीष पात्र, एच.सी. हजरा, उपाध्यक्ष केदारनाथ अग्रवाल, जलेश कवि, ओम प्रकाश, अरुण सिंह सहित अन्य सदस्यों ने एक स्वर में विरोध जताया। अधिवक्ताओं ने कहा कि संघ को बिना जानकारी दिए ऐसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव को आगे बढ़ाना अनुचित है। उन्होंने निर्णय लिया कि इस विषय पर राज्य के मुख्यमंत्री और झारखंड हाई कोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस को लिखित आवेदन देकर आपत्ति दर्ज की जाएगी।
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जलजमाव को आधार बनाकर स्थानांतरण का प्रस्ताव, अधिवक्ताओं ने बताए तथ्य
बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने RTI सूचना का हवाला देते हुए बताया कि सिविल न्यायालय भवन के पीछे बरसात के मौसम में जलजमाव की समस्या को आधार बनाकर स्थानांतरण का प्रस्ताव दिया गया है। जबकि पिछले दो वर्षों में नगर पंचायत सरायकेला तथा संबंधित विभाग द्वारा जल निकासी सुधार कार्यों पर लगभग चार से पाँच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिसके बाद दो वर्षों से किसी भी मौसम में जलजमाव की समस्या नहीं दिखी है। अधिवक्ताओं ने कहा कि जिस समस्या को आधार बनाकर न्यायालय भवन को हटाने का प्रस्ताव दिया जा रहा है, वह अब अस्तित्व में ही नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायालय भवन के आगे-पीछे व्यापक सरकारी भूमि उपलब्ध है, जहां आवश्यकता के अनुसार नए सिरे से भवन का निर्माण भी किया जा सकता है। यह स्थान क्षेत्र के केंद्र में, सुरक्षित तथा जनता की सुगमता के लिए उपयुक्त है।
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प्रतिनिधिमंडल करेगा अधिकारियों से मुलाकात, प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग रखी जाएगी
बैठक में मौजूद सभी अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि बहुत जल्द जिला अधिवक्ता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेगा और स्थल की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय भवन क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र आय के स्रोतों में से एक है, इसलिए इसका स्थानांतरण न केवल न्यायिक प्रक्रिया बल्कि स्थानीय व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इसलिए स्थानांतरण प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए न्यायालय को वर्तमान परिसर में ही बनाए रखने की मांग की जाएगी। बैठक में अधिवक्ता जीवानंद पांडा, अनिल सारंगी, लखींद्र नायक, राधेश्याम शाह, निर्मला आचार्य, सुनील सिंह, सुशील पदार, आशीष सारंगी, सूरज पूर्ति, राजेश सहाय, सुवास सामंत, नैना पहाड़ी, राजकुमार साहू, प्रदीप तेंदू रथ, रजत पटनायक, दुर्गा चरण जंको, लोकनाथ केसरी, सुखमति हिस्सा, सरोज महाराणा सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।
























