- पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल ने शिक्षा अधीक्षक को सौंपा आवेदन
- डीएसई ने दिया आश्वासन—स्टेट को फॉरवर्ड होगा प्रस्ताव, अस्थायी नियोजन पर विचार
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका प्रखंड के डोमजुड़ी गांव निवासी स्व. दुर्लभ चंद्र दास, जो मोसाबनी ब्लॉक में शिक्षा विभाग के सक्षम साधन सेवी (सीआरपी) के रूप में कार्यरत थे, बीते दिनों घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के दौरान ड्यूटी निभाते हुए गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। चुनाव कार्य के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और हल्का बुखार आने लगा। ड्यूटी समाप्त कर घर लौटते–लौटते उनकी स्थिति और भी खराब हो गई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। स्व. दास का एकमात्र पुत्र पहले ही गंभीर बीमारी से गुजर चुका था, जबकि पुत्री की शादी पहले ही हो चुकी है। ऐसे में उनकी पत्नी पबिता दास आज पूरी तरह असहाय और आर्थिक रूप से टूट चुकी हैं।
इसे भी पढ़ें : Seraikela : समावेशी शिक्षा पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, दिव्यांग बच्चों के लिए सहयोगपूर्ण वातावरण पर जोर
चुनाव कार्य के दौरान बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान सीआरपी का निधन
इसी परिस्थिति को देखते हुए गुरुवार को पोटका के पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के नेतृत्व में मृतक स्व. दुर्लभ चंद्र दास की पत्नी पबिता दास ने जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) पूर्वी सिंहभूम को लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने अपने पति की चुनाव ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत और उसके बाद हुए निधन का विस्तृत उल्लेख करते हुए अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी तथा सभी देय लाभ उपलब्ध करवाने की मांग की। श्रीमती दास ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद उनके सहारे का कोई नहीं बचा है, ऐसे में सरकारी सहयोग ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन बन सकता है।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सीतारामडेरा और मानगो से छह तस्कर गिरफ्तार, 60 पुड़िया ब्राउन शुगर जब्त
विधवा पबिता दास ने अनुकंपा आधारित नौकरी की लगाई गुहार
डीएसई पूर्वी सिंहभूम ने आवेदन प्राप्त कर आश्वस्त किया कि इसे नई मार्गदर्शिका के अनुरूप अनुशंसित करते हुए राज्य मुख्यालय को फॉरवर्ड किया जाएगा। साथ ही उन्होंने अपने स्तर से किसी नजदीकी विद्यालय में अस्थायी रूप से समुचित नियोजन देने पर भी सकारात्मक संकेत दिया। इस अवसर पर पीड़िता पबिता दास के साथ पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल, उनके दामाद एवं हेमंत बेहरा भी उपस्थित थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई इस प्रकार की घटना सरकार के लिए संवेदनशील मामला है और पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता मिलनी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से टूट चुके परिवार को राहत मिल सके।
























