वंचित और जरूरतमंदों को अधिकार दिलाने के लिए पीएलवी बनेंगे सेतु, जिलेभर में चलेगा व्यापक अभियान
कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण पर फोकस
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा 90 दिवसीय सघन कानूनी जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और स्लम बस्तियों में रहने वाले वंचित, शोषित और जरूरतमंद लोगों तक कानूनी जानकारी पहुंचाना है। पीएलवी (पारा लीगल वॉलेंटियर्स), जिन्हें अधिकार मित्र भी कहा जाता है, गांव-गांव जाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेंगे। अभियान का शुभारंभ सोमवार सुबह व्यवहार न्यायालय परिसर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय द्वारा किया गया।
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तख्तियों के माध्यम से लोगों को किया गया जागरूक

अभियान के शुभारंभ के अवसर पर एक प्रभातफेरी का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में न्यायिक पदाधिकारी, वकील, मीडियेटर, कोर्ट स्टाफ और पीएलवी शामिल हुए। यह रैली व्यवहार न्यायालय से निकलकर एमजीएम गोलचक्कर, जेल चौक और साकची शीतला मंदिर होते हुए पुनः न्यायालय परिसर में समाप्त हुई। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने बैनर और तख्तियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया तथा नारे लगाकर कानूनी साक्षरता का संदेश फैलाया। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों को यह समझाना है कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता से ही इसकी शुरुआत होती है।
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प्रभातफेरी से दिया गया जागरूकता का संदेश

इस मौके पर प्रधान जिला जज अरविंद कुमार पांडेय ने कहा कि समाज में कानून और आम लोगों के बीच एक बड़ी दूरी है, जिसे पाटने के लिए केवल कानूनी सहायता ही नहीं बल्कि जागरूकता और सामुदायिक जुड़ाव भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह 90 दिवसीय अभियान एक व्यवस्थित और परिणाम-उन्मुख कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य जिले के हर व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके तहत जमीनी स्तर पर पहुंच, क्षमता निर्माण और विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी सेवा प्रदान की जाएगी।
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न्याय और जागरूकता के बीच की दूरी कम करने की पहल
उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान का मकसद केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाना भी है ताकि वे अपने अधिकारों को पहचान सकें और उनके लिए आवाज उठा सकें। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों, अनुसूचित जनजातियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को इसका लाभ मिलेगा। ‘कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987’ के तहत स्थापित व्यवस्थाओं के माध्यम से लोगों को न्याय तक आसान पहुंच दिलाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही मध्यस्थता, लोक अदालत और आपसी सहमति से विवाद समाधान को बढ़ावा देकर अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने का प्रयास किया जाएगा।























