गोल्ड-सिल्वर रेट में उतार-चढ़ाव, निवेशकों में बढ़ी चिंता, क्या आगे और सस्ता होगा सोना?
सोना खरीदने का सही समय या इंतजार करना बेहतर?
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : सोना-चांदी के बाजार में इन दिनों भारी हलचल देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। देशभर में लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में सोना और सस्ता होगा या फिर इसमें फिर से तेजी आएगी। एक ओर वैश्विक संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार पर दबाव बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर सोने में निवेश को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। MCX और सर्राफा बाजार दोनों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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सोने की कीमतों में गिरावट से निवेशकों की नजर बाजार पर
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक भारत के पास करीब 880.52 मीट्रिक टन सोने का भंडार मौजूद है, जिसमें से लगभग 680 टन देश के वॉल्ट्स में रखा गया है और करीब 197.67 टन विदेशों में सुरक्षित है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी सोने और कच्चे तेल की जरूरतों के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट रेनू अरोड़ा के अनुसार, गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने से देश की विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा और अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर बनेगी। इस बीच बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य आयात कम कर व्यापार घाटे को नियंत्रित करना है।
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भारत के सोना भंडार और आयात नीति पर बढ़ी चर्चा
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहा संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता, सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करने के बाद COMEX पर सोना 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 4,678 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी लगभग 80 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही। डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।
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वैश्विक तनाव से सोना-चांदी के दामों में उतार-चढ़ाव
ज्वेलरी बाजार और संबंधित शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे शादी-ब्याह की तैयारी कर रहे परिवारों से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और डॉलर मजबूत रहता है तो सोने की कीमतों में और गिरावट संभव है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर इसमें फिर से तेजी भी आ सकती है। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।























