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Potka : शिक्षा से ही समाज की उन्नति संभव – राजबल्लभ तांती

  • बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को अंग वस्त्र और पुस्तक देकर किया सम्मानित

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : राजबल्लभ तांती ने क्षेत्र की प्रतिभाशाली छात्राओं को सम्मानित कर शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा जानवी पात्र ने माध्यमिक परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में सर्वोच्च स्थान हासिल किया, वहीं प्रोजेक्ट गर्ल्स प्लस टू विद्यालय की छात्रा दीपा पात्र ने 12वीं कॉमर्स परीक्षा में जिले में द्वितीय स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया। दोनों छात्राओं की उपलब्धि पर राजबल्लभ तांती उनके आवास पहुंचे और अंग वस्त्र के साथ सावित्रीबाई फुले की पुस्तक भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान परिवार और स्थानीय लोगों में भी खुशी का माहौल देखने को मिला।

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छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए निरंतर मार्गदर्शन देने का दिया भरोसा

सम्मान समारोह के दौरान राजबल्लभ तांती ने कहा कि शिक्षा ही ऐसा सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज और देश की प्रगति के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां आज बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित कर रही हैं कि अवसर मिलने पर वे हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने दोनों छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आगे भी वे उन्हें हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग देते रहेंगे।

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Jadugoda : नरवा पहाड़ अस्पताल में एम्बुलेंस सेवा बंद, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

टेंडर समाप्त होने के पांच दिन बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, यूसिल कर्मियों में चिंता आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित होने

  • टेंडर समाप्त होने के पांच दिन बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, यूसिल कर्मियों में चिंता
  • आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित होने से श्रमिकों में बढ़ी नाराजगी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जादूगोड़ा : यूसील की नरवा पहाड़ अस्पताल में एम्बुलेंस सेवा बंद होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में एम्बुलेंस सेवा का टेंडर 11 मई को समाप्त हो गया, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई वैकल्पिक वाहन व्यवस्था नहीं की गई है। इससे यूसिल कर्मियों और उनके परिवारों में भय और चिंता का माहौल है। अस्पताल से जुड़े एक कर्मी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजने के लिए फिलहाल कोई लाइफ सपोर्ट वाहन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ सकता है, जो गंभीर स्थिति में जोखिम भरा साबित हो सकता है।

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मजदूरों ने जल्द नई एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की उठाई मांग

स्थानीय मजदूरों और कर्मचारियों ने यूसील प्रबंधन से जनहित में जल्द नया टेंडर जारी कर एम्बुलेंस सेवा बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना लाइफ सपोर्ट वाहन के गंभीर मरीजों की जान को खतरा हो सकता है और किसी भी समय अप्रिय घटना घट सकती है। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि अस्पताल जैसी जरूरी सेवा में लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल नई एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

Potka : बिना चालान पत्थर परिवहन पर प्रशासन सख्त, कोवाली में हाईवा जब्त

माइनिंग विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बिना दस्तावेज बोल्डर ले जा रहा वाहन पकड़ा गया जिला खनन पदाधिकारी

  • माइनिंग विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बिना दस्तावेज बोल्डर ले जा रहा वाहन पकड़ा गया
  • जिला खनन पदाधिकारी ने कहा- वाहन मालिकों पर लगाया जा रहा है 10 गुना तक जुर्माना

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : कोवाली थाना क्षेत्र के मंगलासाईं एवं आसपास के इलाकों में अवैध पत्थर खनन और बिना चालान परिवहन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद खनन विभाग और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाया। माइनिंग इंस्पेक्टर तथा कोवाली थाना पुलिस द्वारा चलाए गए ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान एक हाईवा को बिना चालान बोल्डर परिवहन करते हुए पकड़ा गया। जांच के दौरान वाहन चालक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद माइनिंग इंस्पेक्टर ने वाहन को जब्त कर कोवाली थाना में रखा। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच की जा रही है तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए आगे भी जारी रहेगा अभियान

जिला खनन पदाधिकारी सतीश कुमार नायक ने बताया कि सरकार द्वारा वर्तमान में दो प्रकार के विकल्प लागू किए गए हैं, जिसके तहत एफआईआर दर्ज करने के बजाय वाहन मालिकों पर 10 गुना तक जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना चालान खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य अवैध खनन और खनिज परिवहन पर रोक लगाकर सरकारी राजस्व की चोरी को रोकना है। अधिकारियों ने वाहन मालिकों और कारोबारियों से नियमों का पालन करने की अपील भी की है।

Potka : मुखिया की शिकायत के बाद हल्दीपोखर रेलवे साइडिंग में चला सफाई अभियान

प्रदूषण और उड़ते धूलकणों से परेशान ग्रामीणों को मिली राहत, सड़क पर हटाया गया आयरन ओर और कोयला चूर्ण स्कूली

  • प्रदूषण और उड़ते धूलकणों से परेशान ग्रामीणों को मिली राहत, सड़क पर हटाया गया आयरन ओर और कोयला चूर्ण
  • स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को हो रही थी परेशानी, मुखिया ने उठाई स्थायी समाधान की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : हल्दीपोखर रेलवे साइडिंग में ओवरलोडिंग के कारण फैल रहे प्रदूषण को लेकर पंचायत की मुखिया देवी कुमारी भूमिज द्वारा प्रदूषण विभाग से लेकर एनजीटी तक लिखित शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद प्रदूषण विभाग की टीम रेलवे साइडिंग पहुंची और ठेकेदार को तत्काल सफाई अभियान चलाने तथा नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने का निर्देश दिया। इसके बाद रेलवे साइडिंग प्रबंधन की ओर से सड़क पर जमा आयरन ओर और कोयला चूर्ण की सफाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। अभियान के दौरान सड़क पर फैले धूलकणों को हटाया गया तथा पूरे मार्ग में झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की गई। लंबे समय से इस क्षेत्र के लोग प्रदूषण और उड़ते धूलकणों से परेशान थे, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा था।

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नियमित सफाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे साइडिंग से उड़ने वाले धूलकणों के कारण प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों स्कूली बच्चों, यात्रियों और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पंचायत की मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने कहा कि केवल एक दिन की सफाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने रेलवे साइडिंग प्रबंधन से नियमित रूप से सफाई अभियान चलाने और पानी का छिड़काव कराने की मांग की, ताकि लोग गंभीर बीमारियों से बच सकें। उन्होंने कहा कि धूल प्रदूषण के कारण कई लोग स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हो चुके हैं। यदि लगातार सफाई नहीं कराई गई तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा।

Potka : शिक्षा और संस्कृति से ही मानवता की रक्षा संभव – जन्मेजय सरदार

मानपुर पंचायत भवन में “शिक्षा, संस्कृति एवं मानवता बचाओ” विषय पर आयोजित हुआ प्रेरणादायी कार्यक्रम बच्चों और युवाओं को शिक्षा

  • मानपुर पंचायत भवन में “शिक्षा, संस्कृति एवं मानवता बचाओ” विषय पर आयोजित हुआ प्रेरणादायी कार्यक्रम
  • बच्चों और युवाओं को शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का दिया संदेश

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन की ओर से शनिवार को मानपुर पंचायत भवन में “शिक्षा, संस्कृति एवं मानवता बचाओ” विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “गाजुड” संस्था के संस्थापक जन्मेजय सरदार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान बच्चों और युवाओं को शिक्षा के महत्व तथा सामाजिक मूल्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही समाज को सही दिशा देने का सबसे मजबूत माध्यम है। आयोजन के दौरान बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।

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संघर्ष और धैर्य से ही जीवन में मिलती है सफलता : जन्मेजय सरदार

मुख्य अतिथि जन्मेजय सरदार ने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है और यही इंसान को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि कलम की ताकत तलवार से भी अधिक प्रभावशाली होती है और शिक्षा के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में धैर्य और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी है। जैसे कोई वृक्ष एक दिन में फल नहीं देता, उसी प्रकार सफलता भी समय और संघर्ष के बाद मिलती है। उन्होंने कहा कि जितना कठिन संघर्ष होगा, सफलता उतनी ही शानदार होगी।

Gua : सारंडा के 10 वन ग्राम अब भी राजस्व दर्जे से वंचित, ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश

दशकों से लंबित मांग पर कार्रवाई नहीं होने से आदिवासी ग्रामीणों में नाराजगी रैयती खतियान मिलने के बावजूद नहीं कट

  • दशकों से लंबित मांग पर कार्रवाई नहीं होने से आदिवासी ग्रामीणों में नाराजगी
  • रैयती खतियान मिलने के बावजूद नहीं कट रही मालगुजारी रसीद
  • खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र के मूल निवासियों को अधिकार नहीं मिलने पर उठे सवाल

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : सारंडा के घने जंगलों में बसे 10 वैध वन ग्राम आज भी सरकारी उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का सामना कर रहे हैं। दशकों से इन गांवों को राजस्व ग्राम में बदलने की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से हजारों आदिवासी ग्रामीण अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 1905 से 1927 के बीच वन विभाग द्वारा जंगल संरक्षण के उद्देश्य से इन गांवों को बसाया गया था। जनजातीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में कुल 14 वैध वन ग्राम हैं, जिनमें से 10 केवल सारंडा क्षेत्र में स्थित हैं। इसके बावजूद आज तक इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सरकार और प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है।

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प्रमाण पत्र और सरकारी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को करना पड़ रहा संघर्ष

मनोहरपुर प्रखंड के थोलकोबाद, तिरिलपोसी, नयागांव, दीघा, बिटकिलसोया, बलिबा और कुमडी तथा नोवामुंडी प्रखंड के करमपदा, नवागांव और भनगांव के ग्रामीण वर्षों से अपनी पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में मामला फाइलों तक सीमित रह जाता है। स्थिति यह है कि यहां के लोगों को जाति, आवासीय और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वर्ष 1991-92 में ग्रामीणों को रैयती खतियान मिलने के बावजूद अब तक मालगुजारी रसीद नहीं काटी जा रही है। वहीं मुंडा, डाकुआ और दिउरी जैसे पारंपरिक पदाधिकारियों को भी सरकारी मानदेय से वंचित रखा गया है। इससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

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आंदोलन की चेतावनी देकर ग्रामीणों ने सरकार से की त्वरित कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सारंडा क्षेत्र खनिज संपदा से भरपूर है और यहां से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन यहां के मूल निवासियों को आज तक उनका अधिकार नहीं मिल सका है। लोगों ने आरोप लगाया कि विकास और योजनाओं के नाम पर केवल घोषणाएं होती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखाई देता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित नहीं किया गया, तो वे व्यापक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर क्षेत्र के लोगों को बुनियादी अधिकार और सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

Gua : वनभुजरी पर्व पर वन देवी की पूजा, पेड़ों के नीचे सामूहिक भोजन कर निभाई परंपरा

गुवासाई गांव में आदिवासी समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया प्रकृति आस्था का पर्व देवरी सुशील पूर्ति ने बताया

  • गुवासाई गांव में आदिवासी समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया प्रकृति आस्था का पर्व
  • देवरी सुशील पूर्ति ने बताया प्रकृति और सामूहिक जीवन का प्रतीक है यह पर्व

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : गुवासाई गांव में रविवार को आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ वनभुजरी पर्व मनाया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने वन देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला। पर्व के दौरान ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूजा-अर्चना के बाद गांव के लोग अपने-अपने घरों के बाहर पेड़ों के नीचे एकत्रित हुए, जहां सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया गया। परंपरा के अनुसार इस दिन गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है, बल्कि सभी लोग खुले वातावरण में एक साथ भोजन बनाते और ग्रहण करते हैं। इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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वनभुजरी पर्व ने सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को किया मजबूत

गांव के देवरी सुशील पूर्ति ने बताया कि वनभुजरी पर्व आदिवासी संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जीवन शैली को मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इस दिन वन देवी की पूजा कर गांव की रक्षा, अच्छी फसल और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की जाती है। पर्व के माध्यम से ग्रामीणों के बीच आपसी भाईचारा, सहयोग और एकता की भावना भी मजबूत होती है। इस मौके पर चंद्र मोहन पूर्ति, लांगो पूर्ति, लंका पूर्ति, जगमोहन पूर्ति सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों की सुंदर झलक देखने को मिली, जिसने नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।

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